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Friday, July 31, 2015

दिल में कोई बात

दिल में कोई बात को  रखना नहीं चाहिए 

दिल में कोई बात को  रखना नहीं चाहिए|
अच्छी लगे या न लगे  कहना चाहिए ||
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बहती नदिया बहती धारा |
कहती है निश्चित मिलेगा किनारा ||
जीवन पथ पर बढ़ते साथी रुकना नहीं चाहिए ||.....

दिल के अरमां आंसू बनकर ,
बह जाते हैं अगर किसी के |
उनके इस हालात पे यारों हँसना नहीं चाहिए ||

धरती, सूरज , चाँद , सितारे ,
हर दम चलेंगे साथ हमारे |
कहता है ये नील गगन हमें झुकना नहीं चाहिए ||

 

हक़ और हकीकत

हक़ और  हक़ीक़त 

हक़ और क्या हक़ीकत है ,
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            आज कल के ज़माने में |
देखा है कतल होते ,
            सरेआम आज थाने में |
अश्कों की नहीं कीमत ,
            पैसों के खजाने में |
दुश्मन भी बने साथी ,
            पैसे को दिखने में |
दिल जलता जलाता है ,
            जलने व जलाने में |
हैरत है इन अश्कों को , 
            आँखों से बहाने में |
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Wednesday, July 29, 2015

मैंने तुम्हारी चाह में

मैंने तुम्हारी चाह में 

मैंने  तुम्हारी   चाह  में   क्या-क्या  नहीं  किया ,
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फिर तुमने मुझको इस तरह से क्यों भुला दिया ||

जिस   दिल   के   आईने   में   तस्वीर  थी   मेरी ,
तुमने  वो  सरे   आम  क्यूँ  सबको  दिखा  दिया ||

मेरे   वास्ते   महफ़िल  में   कभी   रोक  नहीं था ,
किस   वास्ते   तुमने   वहाँ   पहरा   लगा   दिया ||

जब   सिजदे-मिन्नतों   का   कोई   दौर  नहीं  है ,
फिर दिल  के  मंदिरों  में  हमें  क्यों  बसा  लिया ||

माना    की   तुमने   मुझको   धोखा  नहीं  दिया ,
'आज़ाद '  जो    किया  वो  अच्छा   नहीं   किया ||
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Tuesday, July 28, 2015

कलाम को सलाम


कलाम को सलाम 

ऐ कलाम ! तुझको सलाम ,तुम भारत के सच्चे कलाम |
जयघोष कर रहे धरा गगन जय ए.पी.जे.अब्दुल कलाम || ऐ कलाम...
तुम भारत के सच्चे सपूत , मानवता के सच्चे प्रहरी ,
विज्ञान विधाता, कर्मवीर. है कोटि-कोटि तुझको प्रणाम |
जग हँसा मगर तुम मुस्काए ,इसलिए सभी को तुम भाए |
तुम छोड़ चले इस दुनिया को रो रही यहाँ सारी अवाम || ऐ कलाम...
वह तमिलनाडु की भूमि धन्य जिसने ऐसा सपूत जाया |
उन मात-पिता को अभिनन्दन जिस आंचल की पाई छाया |
तुम अभियंता,तुम विज्ञानी , मानवता के तुम सैनानी .
तुमने ही परचम लहराया अन्तरिक्ष जगत में किया नाम || ऐ कलाम...
अग्नि, रोहिणी और पृथ्वी से भारत को चमकाया |
जिसे देखकर शत्रु अचम्भित,कुछ सहमा कुछ सकुचाया |
बच्चों और युवाओं के प्रेरणास्रोत बनकर आये |
आँखों में है नीर लिए जग करता है तुमको सलाम || ऐ कलाम...
तुम चले गए पर छोड़ गये अनुपम पद -चिह्नों के निशान |
हे !'भारतरत्न 'और 'पद्म्विभूषण 'तुमसे है भारत की शान |
विज्ञान उपासक,ज्ञान्देवता ,गीता और कुरान उपासक ,
मानवता के संवाहक 'आज़ाद 'तुम्हे शत-शत प्रणाम || ऐ कलाम...

Sunday, July 26, 2015

कारगिल के शहीदों की याद में

करगिल के शहीदों की याद में  ......

दे रही है विदा अश्रु से धरती माँ ,
            ओढ़कर चल दिए जब कफ़न नौजवां |
रक्त -रंजित धरा के उरोजों  में वे ,
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            टेक मस्तक सदा सो गए नौजवां  ||

खिलखिलाती  चहकती हुई धूप सी ,
            दिख रही है मलिन सर झुकाए हुए |
चन्द्रमा रो रहा सूर्य उदास है ,
            झुक गया है नमन वास्ते आसमां ||

खुश रहो तुम सदा तुम मेरे लाडले ,
            प्राण अर्पण किया देश के वास्ते  |
देते आशीष कहने लगी धरती माँ ,
           जब गुजरने लगा पास से कारवां ||

याद रखेगा तुमको जमाना सदा ,
          तुमने जुल्मों सितम को सहा खेलकर |
मुल्क 'आजाद' तुमने तो कर ही दिया ,
          नाम सदियों तक गायेगा सारा जहाँ ||

कर्मवीर

 कर्मवीर 
जो कर्मवीर नर होता है ,
         वह तनिक नहीं पछताता  है |
आँधी और तूफानों में भी ,
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         आगे बढ़ता जाता है |

अपने विवेक अरु भुजबल से ,
         दुष्कर को कर दिखलाता है |
जीवन में आई हलचल से ,
        वह तनिक नहीं घबराता है |

कर्त्तव्य मार्ग से विचलित होना ,
        उसको नहीं सुहाता है |
वह मानव का परम मित्र बन ,
        सब दिल पर छा जाता है |

अपने पौरष के बल पर ही ,
        प्रारब्ध बदल रख देता है |
अपने अदम्य साहस से ही,
        वह शत्रुंजय कहलाता है |

उसके गौरव की गाथा ,
        जन-जन में गाई जाती है |
उसके कीर्ति विजय की महिमा ,
        सर्वत्र सुनाई जाती है |

मातृभूमि हित प्राण गवाना ,
        अपना फ़र्ज समझता है |
प्रेम संदेसा मानवता का ,
        जन-जन तक पहुंचाता है |

अपने श्रम के बल पर ही ,
       पर्वत में राह बनाता है |
सुखी रेती में परीश्रम से ,

       स्वर्णिम पुष्प खिलाता है |

अपने श्रम के पारसमणि से ,
       खुशहाली फैलाता है |
पद-मर्दित आशाओं को ,
       वह हँसकर गले लगाता है |

सागर का अंतस्थल मथकर ,
       वह मोती ले आता है |
विपदाओं में हँसकर जीना ,
       उसके मन को भाता है |

सागर की लहरों से आगे ,
       नाव लिए बढ़ जाता है |
आगे बढ़कर पीछे मुड़ना ,
      उसको नहीं सुहाता है |

जीवन का इक अंग समझ ,
      सुख -दुःख से हाथ मिलाता है |
उसके सम्मुख कायर जुल्मी,
       नत मस्तक ही जाता है |

आगे बढ़ना बढ़ते रहना ,
       के पथ को अपनाता है |
जन-जन को खुशहाली देने 
       का वह लक्ष्य बनाता है |

Saturday, July 25, 2015

यादों के पल

यादों के पल

                                         यादों के पल

तुम्हारी यादों में तस्वीर बनके आऊँगा |
             भूलकर भी नहीं तुम मुझको भूल पाओगे ||
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दर्द सीने में नहीं आग लिए फिरता हूँ |
             दिल लगाओगे तो तुम राख ही हो जाओगे ||
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मुझ पर एहसान का अब और बोझ न लादो |
            टूट जाऊंगा तो देखते ही रह जाओगे ||
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बड़े विश्वास से दिल मैंने दिया था तुझको ,
           आईने दिल को मेरे तोड़कर क्या पाओगे ||
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देखना चाहते हो आज़ाद तोड़कर अगर ,
            हर एक टुकड़े में तस्वीर मेरी पाओगे ||
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