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Wednesday, March 30, 2016

प्रगति के अवरोधक तत्व

    प्रगति के अवरोधक
मृत्युलोक में सब नश्वर है जाति नहीं नश्वर है |
जाति नष्ट हो जाए तो यह धरा स्वर्ग से बढ़कर है ||
इसी के कारण वैर वैमनस्य दिल में दस्तक देता है |
ऊँच-नीच के अंकुर उगकर वृक्ष रूप धर लेता है ||

धर्म के ठेकेदारों की दूकान इसी के बल चलती |
कर्म-काण्ड की संरचना भी उसके संग संग चलती है ||
भारत का संविधान ताक पर रखा हुआ रह जाता है |
लोकतंत्र के प्रगति-पंथ गतिरोधक आ जाता है ||

मानवता के बीच सियासत नया रंग दिखलाती है |
जाति-पाँति का संबल लेकर अपना काम बनाती है ||
शिक्षा का हथियार भी इसके सम्मुख कुंठित दिखता है |
धर्म दीवार खड़ी करने में कोई कसर न रखता है ||

जाति-जाति में प्रेम अगर दो दिल को जोड़ने आता है |
सच कहता हूँ जातीयता उस प्रेम को भी खा जाता है ||
छूत-अछूत की घृणित भावना अगर कहीं पर दिखती है |
मानवता के उजले मुख पर मानों कालिख मलती है ||

भारत के दिल में देखो तो जाति की घृणित क्यारी है |
ऊँच-नीच की विषम वेदना से ग्रसित नर-नारी है ||
धर्म के आरक्षण पर देखो जाति का गहरा पहरा है |
ऐसे लोगों के कारण संविधान हमारा बहरा है ||
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  मंदिर-मस्जिद में देखो आरक्षण जाति का भारी है |
पंडित ,मुल्ला और मौलवी सबसे बड़े अधिकारी हैं ||
इनके फरमानों के आगे संविधान चुप हो जाता है |
जातिवाद के कारण ही भारत पीछे रह जाता है ||

जातियता की अमरबेल को आओ हम उखाड़ फेंके |
और संवारें मानवता को जातिविहीन समाज देके ||
यही कामना हर मानव के दिल में हमें जगानी है |
भारत को इस विश्व पटल पर नव पहचान बनानी है ||
कवि एवं साहित्यकार 
राम चन्दर 'आज़ाद'
मो.9982395653




 



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