बसंतागमन
चहक उठे खग बगियन में फूलों से खुशबू आई है |
ऋतुराज बसंत के स्वागत में भौरों ने तान सुनाई
है ||
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आम गए बौराए सुवास बिखेरत आपन |
फाग के राग सुनाय कोयल फिरती घर आँगन |
गरमी के तेवर देखि देखि ठंडी बहुतै घबराई है ||
ऋतुराज बसंत के स्वागत में भौरों ने तान सुनाई
है ||
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खेतों मुस्काय रही है सरसों पीली ,
ओढ़ चुनरिया चमक रही है अलसी नीली |
गेहुवन की बाली देखि देखि कृषक नैना हरषाई है ||
ऋतुराज बसंत के स्वागत में भौरों ने तान सुनाई
है ||
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लाल, हरे ,पीले ,नीले परिधान पहनकर ,
अवनि लग रही जैसे कोई परी हो सुन्दर |
देख अर्क की चंचल नज़रें वह कुछ कुछ शरमाई है ||
ऋतुराज बसंत के स्वागत में भौरों ने तान सुनाई
है ||
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उर स्पर्शी पवन करे तन मन को विह्वल ,
चहक उठी नूतन उमंग संग प्रकृति चंचल |
यौवन में उन्मत्त प्रकृति आँचल अपनी सरकाई है ||
ऋतुराज बसंत के स्वागत में भौरों ने तान सुनाई
है ||
कवि एवं साहित्यकार – रामचंदर
‘आजाद’
जवाहर नवोदय
विद्यालय पचपहाड़ ,झालावाड़ (राज.)
मोबाईल- 09414750971,09982395653

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