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Monday, March 14, 2016

चंचल मन


चंचल मन मेरो कहा न माने |

चंचल मन मेरो कहा न माने |

जब  जब इसको  रोकन चाहूँ  सुनत न  बात  सयाने |
इक पल रुकत पुनः फिर भाजति  नाना  करत  बहाने||

करम धरम और योग  ध्यान में कुछ पल रुकत रुकाने |
जैसहि  थोड़ा  अवसर  पावत  करत   अन्यत्र  पयाने ||

बीते पल  को सोचि- सोचि  कर  लागत  अश्रु  बहाने |
कहि ‘आजाद’ कछु समझ न आवत काम करत मनमाने ||

कवि एवं साहित्यकार – रामचंदर ‘आजाद’
जवाहर नवोदय विद्यालय पचपहाड़ ,झालावाड़ (राज.)
मोबाईल- 9414750971


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