चंचल मन मेरो कहा न माने |
चंचल मन मेरो कहा न माने |
जब जब इसको रोकन चाहूँ सुनत न बात सयाने
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इक पल रुकत पुनः फिर भाजति नाना करत बहाने||
करम धरम और योग
ध्यान में कुछ पल रुकत रुकाने |
जैसहि थोड़ा अवसर
पावत करत अन्यत्र
पयाने ||
बीते पल को सोचि-
सोचि कर
लागत अश्रु बहाने |
कहि ‘आजाद’ कछु समझ न आवत काम करत मनमाने ||
कवि एवं साहित्यकार – रामचंदर ‘आजाद’
जवाहर नवोदय विद्यालय पचपहाड़ ,झालावाड़ (राज.)
मोबाईल- 9414750971

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