शिक्षक और शिक्षा
शिक्षा की लगाम अब ,बे- लगाम हो रही है |
जिसकी चर्चा अब सुबह-शाम हो रही है ||
नियम कानून देखो ऐसे-ऐसे बन रहे ,
शिक्षक बेचारे की तो राम-राम हो रही है ||
कैसे अनुशासन का सबक सिखाये वह ,
जब अनुशासन दिखे राह नापती हुई ||
मारना व् डांटना तो कोसों दूर बात है ,
घिघी बंधी उसको आवाज कांपती हुई ||
शिक्षक पूछता कैसे लेट तुम हो गया ?
छात्र बोलता है लेट हो गया तो क्या हुआ ?
सबक दिखाओ जरा उसे क्यों न पूरा किया ?
काम नहीं पूरा किया इसमें क्या हो गया ?
नियम कानून तो शिक्षक को बाँध दिया ,
फिर भी समाज उससे आस है लगाये हुए |
वेतन ने बे-तन तो पहले बना दिया था ,
अब आत्मा पर तीखी नजर गड़ाए हुए ||
तुम ही बताओ मेरे देश के सुधारको ,
एक शिक्षक कैसे पूरी पाठशाला को चलाये |
हिंदी ,अंग्रेजी व् गणित न जाने क्या-क्या ,
कैसे सारे विषयों को एक साथ ओ पढ़ाये ||
हर कोई चाहता है अच्छी शिक्षा लाडले की
कोई शिक्षक कार्य को पर अच्छा नहीं मानता |
आज शिक्षा नाच रही पैसों के इशारे पर ,
इसीलिए शिक्षक को बेचारा सब मानता ||


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