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Saturday, September 26, 2015

वाक् संयम

वाक् संयम 

जहाँ लोग बोलते हों ज्यादा ,
वहाँ चुप रहना ही अच्छा है |
तुम बोलोगे कौन सुनेगा ?
सो चुप रहना ही अच्छा है ||


पहले लोगों की बात सुनो ,
उनको बातों का माप करो |
फिर जो कुछ तुमको कहना है ,
मन से पूछो क्या अच्छा है ?

जिह्वा पर संयम रखना भी ,
सब लोगों को है नहीं आता |
क्योंकि यह एक कठिन संयम ,
बिरलों को ही लगता अच्छा है ||

जीवन में यदि कुछ करना है ,
तो संयम से रहना होगा ||
जीवन को सफल बनाने में ,
कष्टों से लड़ना अच्छा है ||

मौन है सबसे बड़ी तपस्या ,
ऋषि ,मुनियों को लगती प्यारी है |
योग,साधना ,पूजा का छण,
उसका संग लगता अच्छा है ||





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