Followers

Tuesday, September 15, 2015

जी हाँ, मैं अध्यापक हूँ |


जी हाँ, मैं अध्यापक हूँ 

जी आपने जो भी कहा 
सच ही कहा -
पुस्तकों के ढेर में ,
अपने को घिरा पाता हूँ |
जी हाँ, मैं अध्यापक हूँ |

बस पढ़ता और पढ़ाता हूँ ||
*****************
दोस्ती है दुश्मनी भी ,
पुस्तकों के संग फिर भी ,
नीद निशि का चैन दिन का ,
हँस-हँसकर लुटाता हूँ |
जी हाँ, मैं अध्यापक हूँ |
बस पढ़ता और पढ़ाता हूँ ||
*****************
दंभ, द्वेष ,छल-कपट के हटकर ,
कर्म क्षेत्र में डटकर ,
सौम्य,साम्य ,संपन्न ,समुन्नत
के पथ को अपनाता हूँ ||
जी हाँ, मैं अध्यापक हूँ |
बस पढ़ता और पढ़ाता हूँ ||
*****************
नहीं कर्म में शर्म है कोई ,
जीवन का मेरे मर्म यही ,
मानव की मानवता को में ,
लिख-लिखकर समझाता हूँ ||
जी हाँ, मैं अध्यापक हूँ |
बस पढ़ता और पढ़ाता हूँ ||
*****************
ज्ञान दीप के किरण-पुंज से ,
अन्तस्थल में व्याप्त कालिमा ,
हलके-हलके ,धीरे-धीरे ,
रगड़-रगड़ चमकाता हूँ ||
जी हाँ, मैं अध्यापक हूँ |
बस पढ़ता और पढ़ाता हूँ ||
*****************
पेन-पेन्सिल और डस्टर डंडे ,
ये ही मेरे हैं हथकंडे ,
मैं बनकर पुस्तक का साथी ,
साथ-साथ इठलाता हूँ ||
जी हाँ, मैं अध्यापक हूँ |
बस पढ़ता और पढ़ाता हूँ ||
*****************
जाति, धर्म व राग-द्वेष से हटकर ,
कर्त्तव्य मार्ग पर डटकर ,
समता, ममता ,अस्तेयता का ,
सुन्दर पुष्प खिलाता हूँ ||
जी हाँ, मैं अध्यापक हूँ |
बस पढ़ता और पढ़ाता हूँ ||
*****************
मन में सागर-सी लहरें हैं ,
पर्वत-सी अडिगता लिए हुए ,
खड़ा हुआ मैं -
झूम-झूमकर अपना पाठ पढाता हूँ ||
जी हाँ, मैं अध्यापक हूँ |
बस पढ़ता और पढ़ाता हूँ ||












No comments: