हे भारत के शेरे वीर !!!
जंग लग गए अस्त्र-शस्त्र में ,
कब तक मौन रहोगे प्रहरी ,
भारत अब हो रहा अधीर ||
जुल्मिस्तान के जुल्म सहोगे ,
और रखोगे कब तक धीर ,
गर्व चूर कर दो अब उसका ,
हे भारत के शेरे वीर !!
ना जाने इतराय रहा क्यूँ ,
फुदक रहा मेढक के जैसे ,
अब तो सबक सिखाना होगा ,
ऐसे वैसे चाहे जैसे ||
कायरता से बाज न आता ,
छिप-छिपकर वह शोर मचाता ,
मगर सामने आने से वह ,
गीदड़ सम छिपता कतराता ||
उसे दिखा दो उसकी सूरत ,
ऐ भारत के सिंह सपूत |
कभी न फिर पीछे मुड़ देखे ,
वह कायर और जुल्मी धूर्त ||
कवि -राम चंदर 'आजाद'
जवाहर नवोदय विद्यालय पचपहाड़ ,
जिला- झालावाड़ (राज.)








