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Saturday, July 25, 2015

दलितों के मसीहा

दलितों के मसीहा 

   दलितों के मसीहा तुम इक बार चले आओ |
   कानून लुटरों को कानून सिखा जाओ ||
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   बेखौफ घूमते हैं कानून के हत्यारे |
   कानून के रखवाले फिरते मारे-मारे |
   अब उनके लिए कोई कानून बना जाओ ||
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   संशोधन के बल पर कानून बनाते हैं |
   झूठे कसमें वादों से वे देश चलाते हैं ||
   ऐसे नेताओं को कानून सिखा जाओ ||
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   दलितों को लुटते हैं वे जाति बना करके |
   जनमत हासिल करते वे घर-घर जा करके ||
   अब फिर से उन्हें आकर इक बार जगा जाओ ||
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सुख दुख रहता है साथ

सुख -दुःख रहता है साथ -साथ 

       सुख -दुःख रहता है साथ-साथ ,
       कोई सुखी कोई दुखी कोई पड़ा बीमार है |
       कष्ट में देता बिता पूरी की पूरी रात-रात |
                  सुख -दुःख रहता है साथ-साथ ||

       कोई गाता है फिल्म गजल ,
       कोई गाता है गीत भजन |
       कोई रटता है नाम प्रभू ,
       सहता है कठिन से कठिन ताप |
                  सुख -दुःख रहता है साथ-साथ ||

       गीता और रमायन में ,
       बाइबिल और कुरान में,
       इक सच्चे इनसान में,
       वेद और पुराण में 
       सबमें मिलती है एक बात |
                 सुख -दुःख रहता है साथ-साथ ||

       सुख -दुःख जीवन का एक अंग ,
       रहता जीवन के संग-संग |
       जिस दिन जीवन का हुआ अंत ,
       सुख-दुःख ने छोड़ दिया साथ ||

             सुख -दुःख रहता है साथ-साथ ||


मेरी लेखनी

मेरी लेखनी 

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मन में उठे विचार को कैसे बयां करूँ |
थी पास मेरी लेखनी सो उससे कह दिया ||
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इक बात तहे दिल में छिपा करके रखी थी |
लिख करके सरेआम ओ सबको दिखा दिया ||
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बातों ही बातों में मेरी हमदर्द कब बनी |
मुझको नहीं पता मगर सबको बता दिया ||
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रहती है हमसफ़र की तरह पास ये मेरे |
चुपके से मेरे राज को बेराज कर दिया ||
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मझको नहीं आज़ाद तनिक भी भनक लगी |
पर सबको मेरी दास्ताँ इसने सुना दिया ||

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जिंदगी इस तरह से

जिन्दगी इस तरह से बसर कीजिए

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जिन्दगी इस  तरह से बसर कीजिए |
हाल  बेहाल  हो  ना, सबर  कीजिए ||
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मौत आ जाये कब कुछ पता ही नहीं, 
इसलिए हर समय की कदर कीजिए ||
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दिल की आहें किसी की ना ठुकराइए |
एक मौका मिला है पहल कीजिए ||
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म की यादों को मुस्कान के हाथ में,
सौंपकर इक सुरीली लहर दीजिये ||
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भीग जाये न यादों में पलकें कहीं ,
आँसुओं को न आँखों में घर दीजिये ||
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जिन्दगी को जिओ होके आज़ाद तुम ,
हर ख़ुशी के लिए ही समर कीजिए ||
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एक पंछी डाल

एक पंछी डाल---------

एक पंछी डाल---------

एक पंछी डाल तजकर उड़ गया है |
वह तरु की डाल सूना कर गया है ||

       मौन है सारी दिशाएँ, सब परिंदे मौन हैं |
            मौन मारुत की चपलता,आशियाने मौन हैं |
                 दिख रहे चुपचाप जैसे ,उनका कोई खो गया है |
                       एक पंछी डाल तजकर उड़ गया है ---------------|

पेड़ सूना-सा खड़ा है ,डालियाँ चुपचाप हैं |
     पत्तियां कम्पन रहित हैं , कोंपलें मुरझा गयी हैं |
           भ्रामरी संगीत जैसे भ्रमरों से छिन गया है |
                 एक पंछी डाल तजकर उड़ गया है ---------------|

       यह तमन्ना सब की है , वह लौट कर आ जायेगा |
      और खुशियों का जखीरा साथ अपने लायेगा |
      पर अभी आया नहीं सूर्यास्त भी तो हो गया है |
      एक पंछी डाल तजकर उड़ गया है ---------------|

रात गहराने लगी है ,धड़कने बढ़ने लगी है |
           लौटने की आस में अब दूरियां बढ़ने लगी हैं |
                फासला अब और ज्यादा लौटने का हो गया है |
                     एक पंछी डाल तजकर उड़ गया है ---------------|

तरु खड़ा लाचार बेबस ,शीत अश्रु टपकता है |
      बार -बार उसकी यादों में मचलता तड़पता है |
              सोचता है हे ! विधाता आज ये क्या हो गया है |                  
                    एक पंछी डाल तजकर उड़ गया है ---------------|



                        
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समाज और बाजार

समाज और बाज़ार

नेता अभिनेता चाहे मंतरी व संतरी हों ,
सभी लोग देशवा के लूट मिलि खात हैं |
सरकारी कर्मचारी बन गए व्यभिचारी ,
सरकारी कोष के लुटल आम बात है ||

चोर लूटै चोरी से डकैत सीना जोरी से ,
चोरी करने में ये न तिनकों डरात हैं |
धनपति धन द्वारा ,बलपति बल द्वारा ,
शोषण करन में लगल दिन रात हैं ||

नौकर की नौकरी में ,चाकर की चाकरी में ,
सेवा धर्म रंच मात्र ,अब न लखात हैं |
अधिकारी यदि कभी ,काम करने को कहे,
कहने पर आँख काढि और गुर्रात हैं ||

बेटी के सुहाग बिके, पत्नी औलाद बिके,
कैसे -कैसे वोट भी चुनाव में बिकात हैं |
चहुँ ओरक्रेता और विक्रेता की दुकान लगी ,
सत्य व ईमान जहाँ सस्ते बिकात हैं||

धर्म बिकै कर्म बिकै नारियों के शर्म बिकै,
मंदिरों में संत के भजन भी बिकात हैं |
आज के समाज की आज़ाद क्या बखान करूं ,
खड़े -खड़े लोगों के ज़मीर बिक जात हैं ||

बापू बचपन में शादी

बाल-विवाह कानूनन अपराध है 

 (एक बालिका का निवेदन: अपने पिता से) 

बापू बचपन में शादी जनि रचावा हमरी |
      हो ! रचावा हमरी ,हो! रचावा हमरी||---बापू --

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अबहीं उमर है पढ़न-लिखन की ,भेजा तू स्कूल |
     विद्या ज्ञान से महकी आपन घर आँगन और कूल |
          सोना-चांदी सी जिनिगिया जनि लुटावा हमरी ||---बापू --

शादी ब्याह के  बन्धन में अबहीं ना हमके बाँधा |
     शादी खुशहाली से बढ़कर ना जानी कुछ ज्यादा |
          नाहीं जिनिगिया माटी मा, मिलावा हमरी ||---बापू --

बाल-विवाह सुना हे बापू कानूनन अपराध |
       यहि के चक्कर में परिके हो जइबा तू बरबाद|
           कहते ''आज़ाद '' माना ई कहनवा हमरी ||---बापू                                    



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