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Tuesday, September 8, 2015

समर्पण


समर्पण 
(पूज्य माता -पिता के चरण-कमलों में सादर )

पकड़ अंगुलियाँ जिनकी मैंने ,

           चलना सीखा कदम-कदम |

                    उन्हें समर्पित करता हूँ  मैं ,

                           अपने मन का काव्य-सुमन ||

मुझ पर ममता वारने वाले ,

           मेरा सब कुछ तुम्हें समर्पण |

                  हे ! मेरे तन-मन के पोषक ,

                         तुम्हें समर्पित काव्य-सुमन ||




Sunday, September 6, 2015

कुछ यादें



    राम चन्दर आजाद

   जवाहर नवोदय विद्यालय पचपहाड़ ,
   जिला -झालावाड़ (राज.)
   हिंदी शिक्षक ,
   कवि एवं साहित्यकार 
   प्रमुख रचनाएँ - अर्ध -सतसई , काव्य     सुमन (काव्य -संग्रह ) , आजाद सतसई   (आजाद के दोहे ) , काव्य गौरव एवं          जन संचार ,  ग्राम्य-दर्पण (कहानी -       संग्रह )   |
  पुरस्कार - गुरुश्रेष्ठ ,गुरुपरम एवं वर्ष -२००५ में राष्ट्रीय                 पुरस्कार  ,स्थानीय नगर पालिका , तहसीलदार तथा एस.डी.एम. द्वारा प्रशास्ति पत्र |
  संपर्क - 9414750971, 9982395653                                                          


Saturday, September 5, 2015

शिक्षक और शिक्षा

शिक्षक और शिक्षा 

शिक्षा की लगाम अब ,बे- लगाम हो रही है |
जिसकी चर्चा अब सुबह-शाम हो रही है ||

नियम  कानून देखो ऐसे-ऐसे बन रहे ,
शिक्षक बेचारे की तो राम-राम हो रही है ||

कैसे अनुशासन का सबक सिखाये वह ,
जब अनुशासन दिखे राह नापती हुई ||
मारना व् डांटना तो कोसों दूर बात है ,
घिघी बंधी उसको आवाज कांपती हुई ||

शिक्षक पूछता कैसे लेट तुम हो गया ?
छात्र बोलता है लेट हो गया तो क्या हुआ ?
सबक दिखाओ जरा उसे क्यों न पूरा किया ?
काम नहीं पूरा किया इसमें क्या हो गया ?

नियम कानून तो शिक्षक को बाँध दिया ,
फिर भी समाज उससे आस है लगाये हुए |
वेतन ने बे-तन तो पहले बना दिया था ,
अब आत्मा पर तीखी नजर गड़ाए हुए ||

तुम ही बताओ मेरे देश के सुधारको ,
एक शिक्षक कैसे पूरी पाठशाला को चलाये |
हिंदी ,अंग्रेजी व् गणित न जाने क्या-क्या ,
कैसे सारे विषयों को एक साथ ओ पढ़ाये ||

 हर कोई चाहता है अच्छी शिक्षा लाडले की 
कोई शिक्षक कार्य को पर अच्छा नहीं मानता |
आज शिक्षा नाच रही पैसों के इशारे पर ,
इसीलिए शिक्षक को बेचारा सब मानता ||


                


श्री कृष्ण जन्माष्टमी की हार्दिक शुभ कामनाएँ


श्याम सलोने से-------


श्याम सलोने से ,कुछ ऐसा नाता है |
हम उसको भाते हैं ,वह हमको भाता है ||------

ग्वाल-बाल संग मिलकर,वह माखन खूब चुराए||
खुद खाए और ग्वालों को भी ,माखन खूब खिलाये ||
हम उसको खिलाते हैं ,वह हमको खिलाता है || -------

यमुना तट पर वह जब संग खेलने आये |

दाँव नहीं वह देवे ,जब बारी हमारी आवे||
हम उसे चिढ़ाते हैं, वह हमें चिढ़ाता है ||--------

थोड़ी -सी  दहिया के खातिर, गोपी उसे नचावे |
वह हँसकर मुस्काकर, उसके मन को लुभावे ||
वह उसे नचाती है ,वह उसको नचाता है ||-------

मधुवन में गायों को लेकर, उन्हें चराने जावे |
बैठ कुञ्ज की छांवन में, बंशी मधुर बजावे ||
हम उसे सताते हैं ,वह हमें सताता  है ||-------

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Monday, August 31, 2015

ढोंग और पाखंड ---

ढोंग और पाखंड ---


ढोंग और पाखंड की ऐसी रची कुचाल |
पिसे मसाले बिक गए सील पड़ी बदहाल ||
सील पड़ी बदहाल की उसमे माता प्रगटीं|
पीसन में तन जावेगी माता की भृकुटी ||
कहता है आज़ाद बावरे जग के लोग |
जिन्हें नचावत बन्दर के सम फैला ढोंग ||

मोबाईल से हो गयौ खूब प्रसार-प्रचार |
माता के प्रकोप से हो जाओ हुशियार ||
हो जाओ हुशियार जतन कुछ ऐसा कर लो |
सिल-बट्टे को छोड़ मसाले पीसे ले लो ||
कहता है आज़ाद भीड़ बनिया घर धाईल|
आपस में बतियात हाथ में लिए मोबाइल ||

मंदिर में लड्डू चढें और चढ़ावें भोग |
हे माता रक्षा करो तुम हो सिरजनहार ||
तुम हो सिरजनहार हमारी विनती इतनी |
तुझे मिलेंगे भोग चढ़ावा समरथ जितनी ||
सुनी आज़ाद पुजारी मन फूटे लड्डू |
माता कृपा हेतु चढें मंदिर में लड्डू ||


Sunday, August 23, 2015

चमचागीरी

चमचागीरी

आप ने सीखी सदा ही चमचागीरी ,
सिर झुकाकर सर्वदा की जी हजूरी |
काम करना आप ने सीखा नहीं ही ,
नौकरी में काम जबकि है जरुरी ||

अपने मुँह मिया आप ही मिटठू बनने से ,
नहीं चलेगा काम बिना कुछ करने से |
चमचेपन से नहीं काम अब होने वाला ,
प्रियवर! काम बनेगा स्वयं सुधरने से ||

काम नहीं सीखा ,सीखी है चमचागिरी ,
सो डरके करना काम तुम्हारी है मजबूरी |
कब तक डरकर काम करोगे मेरे प्यारे ,
उसे दिखा दो अपने अन्दर की कस्तूरी ||

चमचे बनकर कब तक उसके साथ फिरोगे ,
कब तक उसकी मनमानी को सहन करोगे |
क्या गँवा दिया पुरुषत्व आपने उसकी हाँ में ,
फिर समाज में कैसे मुख दिखला पाओगे ||

कर्मठता की सदा कदर है होती आई ,
उसने संकट में भी हार नहीं है खाई |
सो कर्मशरण में मेरे प्रियवर आ जाओ ,
कर्मशील की पूजी जाती है परछाईं ||






Friday, August 21, 2015

दिल में है दर्द --------

एक गीत :दिल में है दर्द --------

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दिल में है दर्द मगर फिर भी मुस्कराता हूँ |
याद  आने  पर  कोई  गीत  गुनगुनाता हूँ ||

लोग हँसतें हैं  आजकल  मेरी  तन्हाई पर,
बड़ी मुश्किल से वक्त अपना मैं बिताता हूँ ||

दिन तो कट जाते हैं पर रात गुजरती ही नहीं ,
फिर भी कुछ सोच के करवट बदलता जाता हूँ ||

आइना  आज  न  जाने क्यूँ घूरता है मुझे ,
अपनी तस्वीर से ही चिढ़ता चला जाता हूँ ||

मुझको 'आज़ाद 'नहीं भूल पाएंगे वो कभी ,
क्योंकि मैं स्वप्न में उनको करीब पाता हूँ ||