'ये' और 'वो'
ये कितने सरल, सुलझे और सबको साथ लेकर
चलने वाले हैं |
ये नियम के पक्के ,झुझारू ,कर्मठ और स्वछंद
विचारों वाले हैं |
ये बातों ही बातों में हँसाने वाले ,
अपनी छोटी-छोटी बातों में
बड़ी बात कह जाने वाले हैं |
ये प्रजातंत्र के सम्मान को देश का सम्मान
मानकर चलने वाले हैं |
सबको समदृष्टि से देखने वाले हैं |
ये बोलने लगते हैं तो ,
समय सीमा की परवाह नहीं करते हैं
ये छल, कपट ,दंभ द्वेष से परे
खुद स्वछन्द रहकर
सबको स्वछन्द देखना चाहते हैं |
अपने व्यवहार व् वाणी से ,
कठिन काम को भी सरल बना देते हैं|
कृत्रिमता से कोसों दूर रहने वाले हैं |
नाज़ ,नखरे व क्रोध से परे रहकर
ये पद की गरिमा को महत्त्व देते हैं |
और वो
कितने अक्खड़ और जटिल स्वाभाव के थे |
जिसको समझना मुश्किल ही नहीं ,
बहुत ही मुश्किल टेढ़ी -खीर |
और वो भी
अपने हठनियम के पक्के, कर्मठ
और व्यवहार कुशल थे |
जिसके कारन लोकप्रिय थे
परन्तु
यदि उनके सामने कोई दम हिलाए तो
उसे महत्त्व देते थे |
सोचते थे कि काम आएगा
यदि कोई उनके सम्मुख अपने विचार रखे तो
वो उसे अपना अपमान समझकर
उस पर रोब गांठते थे |
उनकी हाँ में हाँ मिलाने पर खुश होते थे |
वो अक्ल के पक्के तो थे -परन्तु
एक कमी थी कि कान के कच्चे थे |
वो अपने शासन को अनुशासन
अपने ही आदेश को सबसे बड़ा फ़र्ज़ समझते थे |
वो मजाक तो करते थे , परन्तु
उसमे व्यंग्य होता था |
इसलिये लोग उनसे कतराते थे |
इसलिए वाही मिलते थे जो
दुम हिलाते थे |