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Saturday, January 23, 2016
चल सजनी उस देश
प्रीतम गेह दूर अति हौवे नहिं कोई संग विशेष |
Wednesday, January 20, 2016
सखि, मन मेरो स्थिर नाहीं |
सखि, मन मेरो स्थिर.........
सखि, मन मेरो स्थिर
नाहीं |
पिया प्रेम में भयौ दिवानो, बसत है उनकी ठाहीं |
भ्रमर रूप धरि चहुँदिश भटकत,पास
टिकट है नाहीं |
सोचि-सोचि कर कबहूँ हँसूं तो
छन उदास होई जाहीं |
नैननि सो भयौ नींद नदारद मन
कछु समझत नाहीं |
बिसरावन की लाख जुगति करि सपनन
परत दिखाहीं |
मन ‘आजाद’ पिया के बस में करी
सकती कछु नाहीं ||
Sunday, January 17, 2016
समझौता
समझौता
समझौता सचमुच में कायरता की एक निशानी है |
समझौते पर
अमल न करना बहुत बड़ी नादानी है |
ऐसे समझौते
को समझौता कहना बेईमानी है|
जिसकी
शत्रु उड़ाए खिल्ली और करे मनमानी है ||
वासुदेव
समझौता लेकर कौरवराज के पास गए |
समझौते को
कमजोरी कह कौरव सब अट्टहास किये |
अर्ध राज्य
पाण्डव को दे दें जब ऐसा प्रस्ताव दिया |
अभिमानी
दुर्योधन ने तो सभा में ही परिहास किया ||
पाँच गाँव लेकर भी पांडव समझौते पर राजी हैं |
शेष राज्य पर राज करो उनको न कोई नाराजी है |
इस कुरुवंश में तुम सबका भाई-भाई का नाता है |
पाँच गाँव से हे दुर्योधन ! भला बता क्या जाता है?
राज्य कोई है भीख नहीं जो भिक्षा में उनको दूँ
|
ऐसे कायर भिक्षुक को अपना भाई कैसे कह दूँ |
बिना युद्ध के नहीं सूचिका भर भी भूमि उन्हें दूँगा |
ऐसे समझौते को माधव ! नहीं कभी सहमति दूँगा ||
समझौते की कदर न करना पाकिस्तान को भाता है |
इसीलिए दुर्योधन बन वह सबकी हँसी उड़ाता है |
भारत रथ की पकड़ डोर माधव बनकर आना होगा |
अर्जुन बन नापाक पाक को सबक सिखाना ही होगा ||
धृतराष्ट्र सम अन्धा वह पाक वज़ीर कुचाली है |
उसकी आतंकवाद के आगे दाल न गलने वाली है |
आतंकवाद के साये में ही साँस ले रहा बेचारा |
उनके कुछ खिलाफ कहने से जान से जाएगा मारा ||
इसीलिए अब पाक वार्ता करना ही बेकार है |
आतंवादियों के आगे वह
बेबस और लाचार है |
जो होता है हो जाने दो फिकर नहीं करना होगा |
ऐसे क्रूर कुकर्मी को तो कर्म-दण्ड सहना होगा ||
कवि एवं साहित्यकार - राम चंदर 'आजाद'
ज.न.वि. पचपहाड़ ,जिला- झालावाड़ (राज.)
मोबा.9414750971
Monday, January 11, 2016
भिखारी
भिखारी
वह सहनशीलता की मूरत
जी, आप समझते होंगे कि
वह कोई संत पुजारी है
जी, नहीं-नहीं ,जी नहीं-नहीं
वह तो बस एक भिखारी है ||
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कौवे पर उसकी नज़र अडी
है चोंच में रोटी जिसके पड़ी
जी ,आप समझते होंगे कि
वह कोई चतुर शिकारी है |
जी, नहीं-नहीं ,जी नहीं-नहीं
वह तो बस एक भिखारी है ||
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जो जाति ,धर्म का भेद न जाने
जो मानव को बस मानव ही माने
जी ,आप समझते होंगे कि
वह कोई धर्माधिकारी है |
जी, नहीं-नहीं ,जी नहीं-नहीं
वह तो बस एक भिखारी है ||
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सब ऋतुओं में रहता समान
अपमान मान दोनों समान
जो मिल जाता खा लेता है
रूखा –सूखा ,ताज़ा-बासी
जी ,आप समझते होंगे कि
यह किसी की लाचारी है
जी, नहीं-नहीं ,जी नहीं-नहीं
Saturday, January 9, 2016
आखिर कब तक
आखिर कब तक.........
कब तलक रोती रहेंगी सरहदें आखिर हमारी |
अब तो इसके वास्ते इंतजाम होना चाहिए ||
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अब तो दुश्मन में नहीं शायद बची इंसानियत,
उसके माफिक अब कोई पैगाम होना चाहिए ||
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कब तलक रोएँगी माँएं और बहने, बेटियाँ ,
कोई पुख्ता
इसका एहतमाल होना चाहिए ||
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कब तलक खोते रहेंगे अपने नौजवानों को हम,
इस की चर्चा
अब तो सरेआम होना चाहिए ||
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शर्म आती है नहीं उन्हें अपने धूर्त कारनामों पर,
अब तो सच ‘आज़ाद’ कोई कुहराम होना चाहिए ||
Thursday, January 7, 2016
मन तरंग
दोहे – मन तरंग
पुष्प पियारो तबहि तक ,जब तक खुशबू होय |
खशबू के चलि जात ही ,फिर
नहिं पूछत कोय ||1||
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बुरा बसत है मन तेरो ,सो जग बुरा दिखाय |
भला जो देखन लागिहों ,फिर
नहिं बुरा दिखाय ||2||
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मधुर वचन मिसरी लगै, कटुक नीम
सम होय |
जिह्वा पर जैसहि रखत , मन
में मिचली होय ||3||
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दुनिया है बहु काम की, कुछ करिके तो देख |
खुद को यूँ नहिं कोसिये, अपने अन्दर देख ||4||
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कहि आजाद मन साफ़ तो ,का करी
सकत कलंक |
कमल सदा ही खिलत हैं , नीर होहिं या पंक ||5||
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रोग लखै नहिं जाति कुल , रोग
लखै नहीं धर्म |
सच्चा मानव वह हवै, रोग समहि जेहि
कर्म ||6||
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परहित सम नहि धर्म कोइ ,अनहित सम
नहिं पाप |
अब अपने को
तौलिये , किसमें आते आप ||7||
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लाठी में जल मारिये , जल में पड़े
न फर्क |
ऐसहि जिद्दी लोग से , व्यर्थ करब है तर्क ||8||
दोहाकार- राम चंदर ‘आजाद’
Wednesday, January 6, 2016
हे भारत के शेरे वीर
हे भारत के शेरे वीर !!!
जंग लग गए अस्त्र-शस्त्र में ,
कब तक मौन रहोगे प्रहरी ,
भारत अब हो रहा अधीर ||
जुल्मिस्तान के जुल्म सहोगे ,
और रखोगे कब तक धीर ,
गर्व चूर कर दो अब उसका ,
हे भारत के शेरे वीर !!
ना जाने इतराय रहा क्यूँ ,
फुदक रहा मेढक के जैसे ,
अब तो सबक सिखाना होगा ,
ऐसे वैसे चाहे जैसे ||
कायरता से बाज न आता ,
छिप-छिपकर वह शोर मचाता ,
मगर सामने आने से वह ,
गीदड़ सम छिपता कतराता ||
उसे दिखा दो उसकी सूरत ,
ऐ भारत के सिंह सपूत |
कभी न फिर पीछे मुड़ देखे ,
वह कायर और जुल्मी धूर्त ||
कवि -राम चंदर 'आजाद'
जवाहर नवोदय विद्यालय पचपहाड़ ,
जिला- झालावाड़ (राज.)
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