Followers

Sunday, January 17, 2016

समझौता

             समझौता
   समझौता सचमुच में कायरता की एक निशानी है |
    समझौते पर अमल न करना बहुत बड़ी नादानी है |
    ऐसे  समझौते  को समझौता  कहना  बेईमानी है|
    जिसकी शत्रु उड़ाए खिल्ली और करे मनमानी है ||
   
    वासुदेव समझौता लेकर कौरवराज के पास गए |
    समझौते को कमजोरी कह कौरव सब अट्टहास किये |
    अर्ध राज्य पाण्डव को दे दें जब ऐसा प्रस्ताव दिया |
    अभिमानी दुर्योधन ने तो सभा में ही परिहास किया ||

पाँच गाँव लेकर भी पांडव समझौते पर राजी हैं |
शेष राज्य पर राज करो उनको न कोई नाराजी है |
इस कुरुवंश में तुम सबका भाई-भाई का नाता है |
पाँच गाँव से हे दुर्योधन ! भला बता क्या जाता है?

राज्य कोई है भीख नहीं जो भिक्षा में उनको दूँ |
ऐसे कायर भिक्षुक को अपना भाई कैसे कह दूँ |
बिना युद्ध के नहीं सूचिका भर भी भूमि उन्हें दूँगा |
ऐसे समझौते को माधव ! नहीं कभी सहमति दूँगा ||

समझौते की कदर न करना पाकिस्तान को भाता है |
इसीलिए दुर्योधन बन वह सबकी हँसी उड़ाता है |
भारत रथ की पकड़ डोर माधव बनकर आना होगा |
अर्जुन बन नापाक पाक को सबक सिखाना ही होगा ||

धृतराष्ट्र सम अन्धा वह पाक वज़ीर कुचाली है |
उसकी आतंकवाद के आगे दाल न गलने वाली है |
आतंकवाद के साये में ही साँस ले रहा बेचारा |
उनके कुछ खिलाफ कहने से जान से जाएगा मारा ||

इसीलिए अब  पाक  वार्ता करना  ही बेकार है |
आतंवादियों के आगे  वह  बेबस और लाचार है |
जो होता है हो जाने दो फिकर नहीं करना होगा |

ऐसे क्रूर कुकर्मी को तो  कर्म-दण्ड  सहना होगा ||

कवि एवं साहित्यकार - राम चंदर 'आजाद'

ज.न.वि. पचपहाड़ ,जिला- झालावाड़ (राज.)
मोबा.9414750971



Monday, January 11, 2016

भिखारी

    भिखारी


वह त्याग तपस्या की प्रतिमा
वह सहनशीलता की मूरत
जी, आप समझते होंगे कि
वह कोई संत पुजारी है 
जी, नहीं-नहीं ,जी नहीं-नहीं
वह तो बस एक भिखारी है ||
******************
कौवे पर उसकी नज़र अडी
है चोंच में रोटी जिसके पड़ी
जी ,आप समझते होंगे कि
वह कोई चतुर शिकारी है |
जी, नहीं-नहीं ,जी नहीं-नहीं
वह तो बस एक भिखारी है ||
******************
जो जाति ,धर्म का भेद न जाने
जो मानव को बस मानव ही माने
जी ,आप समझते होंगे कि
वह कोई धर्माधिकारी है |
जी, नहीं-नहीं ,जी नहीं-नहीं
वह तो बस एक भिखारी है ||
******************
सब ऋतुओं में रहता समान
अपमान मान दोनों समान
जो मिल जाता खा लेता है
रूखा –सूखा ,ताज़ा-बासी
जी ,आप समझते होंगे कि
यह किसी की लाचारी है
जी, नहीं-नहीं ,जी नहीं-नहीं
वह तो बस एक भिखारी है ||










Saturday, January 9, 2016

आखिर कब तक

आखिर कब तक.........

कब तलक रोती रहेंगी सरहदें  आखिर हमारी |
अब तो इसके वास्ते  इंतजाम  होना चाहिए ||
******************************** 
अब तो दुश्मन में नहीं शायद बची इंसानियत,
उसके माफिक अब  कोई पैगाम होना चाहिए ||
 ********************************
कब  तलक  रोएँगी माँएं  और बहने, बेटियाँ ,
कोई  पुख्ता इसका  एहतमाल  होना चाहिए ||
******************************** 
कब तलक खोते रहेंगे अपने नौजवानों को हम,
इस की  चर्चा अब तो  सरेआम होना चाहिए ||
 ********************************
शर्म आती है नहीं उन्हें अपने धूर्त कारनामों पर,
अब तो सच ‘आज़ाद’ कोई कुहराम होना चाहिए || 


Thursday, January 7, 2016

मन तरंग

दोहे – मन तरंग
पुष्प पियारो तबहि तक ,जब  तक खुशबू होय |
खशबू के चलि जात ही ,फिर नहिं पूछत कोय ||1||
*********************************
बुरा बसत  है मन तेरो ,सो  जग बुरा दिखाय |
भला जो देखन लागिहों ,फिर नहिं बुरा दिखाय ||2||
*********************************
मधुर वचन मिसरी लगै, कटुक नीम सम होय |
जिह्वा पर जैसहि रखत , मन में  मिचली होय ||3||
*********************************
दुनिया है बहु काम की, कुछ  करिके तो देख |
खुद को  यूँ  नहिं  कोसिये, अपने  अन्दर देख ||4||
*********************************
कहि आजाद मन साफ़ तो ,का करी सकत कलंक |
कमल  सदा  ही खिलत हैं , नीर  होहिं  या  पंक ||5||
*********************************
रोग लखै नहिं जाति कुल , रोग लखै  नहीं धर्म |
सच्चा मानव  वह  हवै, रोग  समहि  जेहि  कर्म ||6||
*********************************
परहित सम नहि धर्म कोइ ,अनहित सम नहिं पाप |
अब  अपने   को  तौलिये ,  किसमें   आते   आप ||7||
*********************************
लाठी में जल मारिये , जल  में  पड़े न  फर्क |
ऐसहि  जिद्दी  लोग से , व्यर्थ  करब  है  तर्क ||8||
-‘आजाद सतसई’ से
दोहाकार- राम चंदर ‘आजाद’





Wednesday, January 6, 2016

हे भारत के शेरे वीर

                   हे भारत के शेरे वीर !!!


जंग लग गए अस्त्र-शस्त्र में ,
          मंद पड़ गयी क्या शमसीर ?
कब तक मौन   रहोगे प्रहरी ,
          भारत अब हो रहा   अधीर ||

जुल्मिस्तान के जुल्म सहोगे ,
         और रखोगे  कब  तक  धीर ,
गर्व चूर कर दो अब उसका ,
          हे    भारत   के   शेरे  वीर !!

ना जाने   इतराय   रहा क्यूँ ,
         फुदक रहा   मेढक   के जैसे ,
अब तो सबक सिखाना होगा ,
          ऐसे    वैसे    चाहे    जैसे ||

कायरता  से  बाज  न  आता ,
         छिप-छिपकर वह शोर मचाता ,
मगर   सामने   आने  से  वह ,
         गीदड़ सम छिपता  कतराता ||

उसे दिखा दो उसकी सूरत ,
         ऐ  भारत  के  सिंह   सपूत |
कभी न फिर पीछे मुड़ देखे ,
         वह कायर और जुल्मी धूर्त ||

कवि -राम चंदर 'आजाद'
जवाहर नवोदय विद्यालय पचपहाड़ ,
जिला- झालावाड़ (राज.)



            

    

Monday, January 4, 2016

सबसे बड़ा धर्म

   
 सबसे बड़ा धर्म

काश अगर कोई सुन लेता ,
       गिरिजा ,गुरुद्वारे की बात |  

बम्म धमाके नहीं गूंजते ,
      मंदिर मस्जिद में दिन रात ||

मंदिर की घंटी दिला रही ,
      भजन  कीर्तन   की  यादें |
मस्जिद की नमाज कर रही ,
      अल्लाह से अपनी फरियादें ||

गीता हमको कर्म सिखाती ,
      गुरुग्रंथ  से  मिलता ज्ञान |
सदा सत्य पर चलो साथियों ,
      सबक सिखाती सदा कुरान ||

सबसे बड़ा धरम परसेवा ,
      यह है सब  धर्मों की जान |
जो इसको अपना लेता है ,
      वह  कहलाता श्रेष्ठ महान ||





Friday, January 1, 2016

वह देश हमारा भारत है

वह देश हमारा भारत है

जिस देश की माटी की खुशबू से सुरभित यह बचपन है|
वह देश हमारा  भारत है जिसे  शत शत बार नमन है ||

जहाँ नदियों में पानी अमृत बन सबको जीवन  देता है |
जहाँ परबत सीना तान खड़ा सीमा  पर  पहरा देता है |
जिसके चरण चूमने आतुर  नतमस्तक  हुआ गगन है ||

जहाँ  ऋषि-मुनी , साधू-संतों  की वाणी  में अमृत है |
जिसके उपदेशों की  मिठास जैसे  शक्कर  में घृत है |
जिसके कारण  उनका  स्वागत  होता  अभिनन्दन है ||

जहाँ सत्य,अहिंसा संबल है तो ऐक्य सभी का बल है |
जहाँ क्षमा, दया, करुणा जैसे गंगा-युमना का जल है |
जिसके कीर्ति विजय की गाथा शीतल मलय पवन है ||

जहाँ धर्म धर्म से बातें करते नहीं अधर्म  कोई हैं सहते |
जहाँ गीता और कुरान परस्पर मानवता के पुतले गढ़ते |
जिसके मंदिर ,मस्जिद ,गुरूद्वारे  गाते  गीत भजन हैं ||

जहाँ उपवन में खुशहाली है तो  खेतों में  हरियाली है |
जहाँ प्रकृति भी परिधान पहन दिखती बहु रंगोवाली है |
जिसकी  सुन्दरता को  लखकर  कोयल हुई  मगन है ||

जहाँ ऊषा अभिनन्दन करती है ,नित्य लालिमापन से |
जहाँ सूरज का सम्बन्ध  जुड़ा है लोगों  के जीवन से |
जिसकी महक से पूरित  होकर  हँसते  धरा-गगन हैं ||

जहाँ उगलती सोना-चांदी ऐसी यहाँ  की माटी है |
जहाँ चाँद को चंदा मामा कहने की  परिपाटी है |
ऐसा देश जो सकल विश्व का छूता अन्तःमन है ||