आजाद के छक्के
हो गई सूनी मंडियाँ,सूना
पड़ा बाज़ार |
अब कोई नहीं पूछता ,रोवै
नोट हजार |
रोवै नोट हजार ,पाँच सौ चले
न भाई |
हाय मेरे भगवान् कौन यह आफत
आई |
कहता है ‘आजाद’ रमाये रमै न
धूनी |
आम जनों की जेब हो गई ऐसी
सूनी ||
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सौ रुपये की नोट का होय रहा
सम्मान |
परदे बेपरदे भये जिनको था
अभिमान |
जिनको था अभिमान हजारों है
मेरी कीमत |
अब पूछत नहिं कोई ढेर
बैंकों में दीखत |
कहता है ‘आजाद’ तिजोरी
लाग्यो चोट |
हर कोई ढूँढत फिरै सौ रुपये
की नोट ||
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सभी रुपये जा बसे अब तो
बैंक के पास |
अब कब हाथ में आइहैं हर कोई
की आस |
हर कोई की आस मिलहिं जाने
कब पैसा |
ना जाने कब होइहैं चैन पहले
के जैसा |
कहता है ‘आजाद’ नदारद हो गए
रुपये |
सचमुच में सपने सम हो गए
सभी रुपये ||
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