सरहद के सैनिक
कवित्त-1.
सीमा पे जवान लड़ें खोलि सीना तान लड़ें ,
देश स्वाभिमान कम होना नहीं चाहिए |
नेता जी हमारे जो जवान वीरगति पाते ,
उनके परिवार का धियान होना चाहिए ||
नारी भयी विधवा अनाथ शिशु भये सभी ,
उनकी देखरेख का विधान होना चाहिए |
कहत 'आजाद' वो तो प्राण तजे देश हित ,
नेता जी तुम्हें भी सावधान होना चाहिए ||
कवित्त-2.
उनकी कुर्बानी व्यर्थ तनिक न जाने देंगे ,
ऐसा कह के और उपहास मत कीजिए |
जो गया वो अब कभी वापस न आएगा जी ,
भाषण सुनाय परिहास मत कीजिए ||
अब हीं चुनाव का माहौल भी न आया है जी ,
इसको भुनाने का प्रयास मत कीजिए |
कहत 'आजाद' कुर्सी चाहो जो सलामत तो,
सैनिकों को हाथ खोलने का हक़ दीजिए||
कवित्त-3.
सरहद चीखती है रोज नव रूप लिए,
भारतीय शेरों को दहाड़ने तो दीजिए |
गीदड़ों की धमकी तो सुनि रहे रोज रोज ,
सिंह शावकों को अब हुंकारने तो दीजिए ||
शत्रुओं की क्या मजाल जब संग महाकाल ,
हिमिगिरि अगनि दहकने तो दीजिए |
कहत 'आजाद' मन उठ्यो विकराल ज्वाल ,
नेता जी उसे ज़रा भभकने तो दीजिए ||

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