हे भारत के शेरे वीर
जंग लग गए अस्त्र-शस्त्र में,
कब तक मौन रहोगे प्रहरी,
भारत अब हो रहा अधीर ||
जुल्मिस्तान के जुल्म सहोगे,
और रखोगे कब तक धीर |
गर्व चूर कर दो अब उसका ,
हे भारत के शेरे वीर ||
ना जाने इतराय रहा क्यूँ ,
फुदक रहा मेढक के जैसे
अब तो सबक सिखाना होगा ,
ऐसे वैसे चाहे जैसे ||
कायरता से बाज न आता ,
छिप-छिपकर वह शोर मचाता|
मगर सामने आने से वह ,
गीदड़ सम छिपता कतराता ||
उसे दिखा दो उसकी सूरत ,
ऐ भारत के सिंह सपूत |
कभी न फिर पीछे मुड देखे ,
वह कायर और जुल्मी धूर्त ||
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कवि एवं साहित्यकार- रामचंदर 'आजाद'
मो. 9414750971

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