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Saturday, September 19, 2015

नवोदय नेशनल अवार्ड 2005

नवोदय विद्यालय समिति 
राष्ट्रीय समागम समारोह -2005
हिंदी शिक्षक श्री रामचंदर 'आज़ाद' को राष्ट्रीय पुरस्कार प्रदान करते मानव संसाधन मंत्री श्री अर्जुन सिंह जी एवम् आयुक्त नवोदय विद्यालय समिति  श्री ओ.एन.सिंह जी 








Tuesday, September 15, 2015

जी हाँ, मैं अध्यापक हूँ |


जी हाँ, मैं अध्यापक हूँ 

जी आपने जो भी कहा 
सच ही कहा -
पुस्तकों के ढेर में ,
अपने को घिरा पाता हूँ |
जी हाँ, मैं अध्यापक हूँ |

बस पढ़ता और पढ़ाता हूँ ||
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दोस्ती है दुश्मनी भी ,
पुस्तकों के संग फिर भी ,
नीद निशि का चैन दिन का ,
हँस-हँसकर लुटाता हूँ |
जी हाँ, मैं अध्यापक हूँ |
बस पढ़ता और पढ़ाता हूँ ||
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दंभ, द्वेष ,छल-कपट के हटकर ,
कर्म क्षेत्र में डटकर ,
सौम्य,साम्य ,संपन्न ,समुन्नत
के पथ को अपनाता हूँ ||
जी हाँ, मैं अध्यापक हूँ |
बस पढ़ता और पढ़ाता हूँ ||
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नहीं कर्म में शर्म है कोई ,
जीवन का मेरे मर्म यही ,
मानव की मानवता को में ,
लिख-लिखकर समझाता हूँ ||
जी हाँ, मैं अध्यापक हूँ |
बस पढ़ता और पढ़ाता हूँ ||
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ज्ञान दीप के किरण-पुंज से ,
अन्तस्थल में व्याप्त कालिमा ,
हलके-हलके ,धीरे-धीरे ,
रगड़-रगड़ चमकाता हूँ ||
जी हाँ, मैं अध्यापक हूँ |
बस पढ़ता और पढ़ाता हूँ ||
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पेन-पेन्सिल और डस्टर डंडे ,
ये ही मेरे हैं हथकंडे ,
मैं बनकर पुस्तक का साथी ,
साथ-साथ इठलाता हूँ ||
जी हाँ, मैं अध्यापक हूँ |
बस पढ़ता और पढ़ाता हूँ ||
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जाति, धर्म व राग-द्वेष से हटकर ,
कर्त्तव्य मार्ग पर डटकर ,
समता, ममता ,अस्तेयता का ,
सुन्दर पुष्प खिलाता हूँ ||
जी हाँ, मैं अध्यापक हूँ |
बस पढ़ता और पढ़ाता हूँ ||
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मन में सागर-सी लहरें हैं ,
पर्वत-सी अडिगता लिए हुए ,
खड़ा हुआ मैं -
झूम-झूमकर अपना पाठ पढाता हूँ ||
जी हाँ, मैं अध्यापक हूँ |
बस पढ़ता और पढ़ाता हूँ ||












Saturday, September 12, 2015

राष्ट्रभाषा हिंदी

राष्ट्रभाषा हिंदी 

कोने-कोने देश के ऐलान होना चाहिए |
हिंदी राष्ट्रभाषा है सम्मान होना चाहिए ||
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हो गए अनेक बरस देश को आजाद हुए |
फिर भी फिरंगी जुबान धाक है जमाये हुए ||
ज्ञान लाभ हेतु भाषा -ज्ञान होना चाहिए |
हिंदी का स्थान पर महान होना चाहिए ||
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अंग्रेजी बोल-बोल श्रेष्ठता जताते हैं|
कुछ लोग अंग्रेजी का ही गुण गाते हैं ||
नहीं कोरे ज्ञान पर अभिमान होना चाहिए |
हिंदी राष्ट्रभाषा है सम्मान होना चाहिए ||
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हिंदी प्रति हीन व उपेक्षित भावनाएं न हों |
दुत्कार कर उसे मन से भगाएं हम ||
ऐसा विश्वास हमें ठान लेना चाहिए |
हिंदी राष्ट्रभाषा है सम्मान होना चाहिए ||
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हिन्दवासी, हिन्दीभाषी ,हिन्द के निवासी हम |
मातृभाषा हिंदी को ह्रदय से लगायें हम ||
हिंदी द्वारा देश का विकास होना चाहिए |
हिंदी राष्ट्रभाषा का प्रचार होना चाहिए ||
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हिंदी के हैं सूर्य सूर ,चन्द्र तुलसीदास हैं |
चमकते सितारों जैसे अनेक कवी व्याप्त हैं ||
हिंदी कविकुल का भी सम्मान होना चाहिए |
हिंदी राष्ट्रभाषा है सम्मान होना चाहिए ||









Tuesday, September 8, 2015

समर्पण


समर्पण 
(पूज्य माता -पिता के चरण-कमलों में सादर )

पकड़ अंगुलियाँ जिनकी मैंने ,

           चलना सीखा कदम-कदम |

                    उन्हें समर्पित करता हूँ  मैं ,

                           अपने मन का काव्य-सुमन ||

मुझ पर ममता वारने वाले ,

           मेरा सब कुछ तुम्हें समर्पण |

                  हे ! मेरे तन-मन के पोषक ,

                         तुम्हें समर्पित काव्य-सुमन ||




Sunday, September 6, 2015

कुछ यादें



    राम चन्दर आजाद

   जवाहर नवोदय विद्यालय पचपहाड़ ,
   जिला -झालावाड़ (राज.)
   हिंदी शिक्षक ,
   कवि एवं साहित्यकार 
   प्रमुख रचनाएँ - अर्ध -सतसई , काव्य     सुमन (काव्य -संग्रह ) , आजाद सतसई   (आजाद के दोहे ) , काव्य गौरव एवं          जन संचार ,  ग्राम्य-दर्पण (कहानी -       संग्रह )   |
  पुरस्कार - गुरुश्रेष्ठ ,गुरुपरम एवं वर्ष -२००५ में राष्ट्रीय                 पुरस्कार  ,स्थानीय नगर पालिका , तहसीलदार तथा एस.डी.एम. द्वारा प्रशास्ति पत्र |
  संपर्क - 9414750971, 9982395653                                                          


Saturday, September 5, 2015

शिक्षक और शिक्षा

शिक्षक और शिक्षा 

शिक्षा की लगाम अब ,बे- लगाम हो रही है |
जिसकी चर्चा अब सुबह-शाम हो रही है ||

नियम  कानून देखो ऐसे-ऐसे बन रहे ,
शिक्षक बेचारे की तो राम-राम हो रही है ||

कैसे अनुशासन का सबक सिखाये वह ,
जब अनुशासन दिखे राह नापती हुई ||
मारना व् डांटना तो कोसों दूर बात है ,
घिघी बंधी उसको आवाज कांपती हुई ||

शिक्षक पूछता कैसे लेट तुम हो गया ?
छात्र बोलता है लेट हो गया तो क्या हुआ ?
सबक दिखाओ जरा उसे क्यों न पूरा किया ?
काम नहीं पूरा किया इसमें क्या हो गया ?

नियम कानून तो शिक्षक को बाँध दिया ,
फिर भी समाज उससे आस है लगाये हुए |
वेतन ने बे-तन तो पहले बना दिया था ,
अब आत्मा पर तीखी नजर गड़ाए हुए ||

तुम ही बताओ मेरे देश के सुधारको ,
एक शिक्षक कैसे पूरी पाठशाला को चलाये |
हिंदी ,अंग्रेजी व् गणित न जाने क्या-क्या ,
कैसे सारे विषयों को एक साथ ओ पढ़ाये ||

 हर कोई चाहता है अच्छी शिक्षा लाडले की 
कोई शिक्षक कार्य को पर अच्छा नहीं मानता |
आज शिक्षा नाच रही पैसों के इशारे पर ,
इसीलिए शिक्षक को बेचारा सब मानता ||


                


श्री कृष्ण जन्माष्टमी की हार्दिक शुभ कामनाएँ


श्याम सलोने से-------


श्याम सलोने से ,कुछ ऐसा नाता है |
हम उसको भाते हैं ,वह हमको भाता है ||------

ग्वाल-बाल संग मिलकर,वह माखन खूब चुराए||
खुद खाए और ग्वालों को भी ,माखन खूब खिलाये ||
हम उसको खिलाते हैं ,वह हमको खिलाता है || -------

यमुना तट पर वह जब संग खेलने आये |

दाँव नहीं वह देवे ,जब बारी हमारी आवे||
हम उसे चिढ़ाते हैं, वह हमें चिढ़ाता है ||--------

थोड़ी -सी  दहिया के खातिर, गोपी उसे नचावे |
वह हँसकर मुस्काकर, उसके मन को लुभावे ||
वह उसे नचाती है ,वह उसको नचाता है ||-------

मधुवन में गायों को लेकर, उन्हें चराने जावे |
बैठ कुञ्ज की छांवन में, बंशी मधुर बजावे ||
हम उसे सताते हैं ,वह हमें सताता  है ||-------

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