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Saturday, September 19, 2015
Tuesday, September 15, 2015
जी हाँ, मैं अध्यापक हूँ |
जी हाँ, मैं अध्यापक हूँ
जी आपने जो भी कहासच ही कहा -
पुस्तकों के ढेर में ,
अपने को घिरा पाता हूँ |
जी हाँ, मैं अध्यापक हूँ |
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दोस्ती है दुश्मनी भी ,
पुस्तकों के संग फिर भी ,
नीद निशि का चैन दिन का ,
हँस-हँसकर लुटाता हूँ |
जी हाँ, मैं अध्यापक हूँ |
बस पढ़ता और पढ़ाता हूँ ||
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दंभ, द्वेष ,छल-कपट के हटकर ,
कर्म क्षेत्र में डटकर ,
सौम्य,साम्य ,संपन्न ,समुन्नत
के पथ को अपनाता हूँ ||
जी हाँ, मैं अध्यापक हूँ |
बस पढ़ता और पढ़ाता हूँ ||
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नहीं कर्म में शर्म है कोई ,
जीवन का मेरे मर्म यही ,
मानव की मानवता को में ,
लिख-लिखकर समझाता हूँ ||
जी हाँ, मैं अध्यापक हूँ |
बस पढ़ता और पढ़ाता हूँ ||
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ज्ञान दीप के किरण-पुंज से ,
अन्तस्थल में व्याप्त कालिमा ,
हलके-हलके ,धीरे-धीरे ,
रगड़-रगड़ चमकाता हूँ ||
जी हाँ, मैं अध्यापक हूँ |
बस पढ़ता और पढ़ाता हूँ ||
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पेन-पेन्सिल और डस्टर डंडे ,
ये ही मेरे हैं हथकंडे ,
मैं बनकर पुस्तक का साथी ,
साथ-साथ इठलाता हूँ ||
जी हाँ, मैं अध्यापक हूँ |
बस पढ़ता और पढ़ाता हूँ ||
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जाति, धर्म व राग-द्वेष से हटकर ,
कर्त्तव्य मार्ग पर डटकर ,
समता, ममता ,अस्तेयता का ,
सुन्दर पुष्प खिलाता हूँ ||
जी हाँ, मैं अध्यापक हूँ |
बस पढ़ता और पढ़ाता हूँ ||
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मन में सागर-सी लहरें हैं ,
पर्वत-सी अडिगता लिए हुए ,
खड़ा हुआ मैं -
झूम-झूमकर अपना पाठ पढाता हूँ ||
जी हाँ, मैं अध्यापक हूँ |
बस पढ़ता और पढ़ाता हूँ ||
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Saturday, September 12, 2015
राष्ट्रभाषा हिंदी
राष्ट्रभाषा हिंदी
कोने-कोने देश के ऐलान होना चाहिए |
हिंदी राष्ट्रभाषा है सम्मान होना चाहिए ||
हो गए अनेक बरस देश को आजाद हुए |
फिर भी फिरंगी जुबान धाक है जमाये हुए ||
ज्ञान लाभ हेतु भाषा -ज्ञान होना चाहिए |
हिंदी का स्थान पर महान होना चाहिए ||
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अंग्रेजी बोल-बोल श्रेष्ठता जताते हैं|
कुछ लोग अंग्रेजी का ही गुण गाते हैं ||
नहीं कोरे ज्ञान पर अभिमान होना चाहिए |
हिंदी राष्ट्रभाषा है सम्मान होना चाहिए ||
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हिंदी प्रति हीन व उपेक्षित भावनाएं न हों |
दुत्कार कर उसे मन से भगाएं हम ||
ऐसा विश्वास हमें ठान लेना चाहिए |
हिंदी राष्ट्रभाषा है सम्मान होना चाहिए ||
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हिन्दवासी, हिन्दीभाषी ,हिन्द के निवासी हम |
मातृभाषा हिंदी को ह्रदय से लगायें हम ||
हिंदी द्वारा देश का विकास होना चाहिए |
हिंदी राष्ट्रभाषा का प्रचार होना चाहिए ||
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हिंदी के हैं सूर्य सूर ,चन्द्र तुलसीदास हैं |
चमकते सितारों जैसे अनेक कवी व्याप्त हैं ||
हिंदी कविकुल का भी सम्मान होना चाहिए |
हिंदी राष्ट्रभाषा है सम्मान होना चाहिए ||
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Tuesday, September 8, 2015
Sunday, September 6, 2015
कुछ यादें
राम चन्दर आजाद
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जवाहर नवोदय विद्यालय पचपहाड़ ,
जिला -झालावाड़ (राज.)
हिंदी शिक्षक ,
कवि एवं साहित्यकार
प्रमुख रचनाएँ - अर्ध -सतसई , काव्य सुमन (काव्य -संग्रह ) , आजाद सतसई (आजाद के दोहे ) , काव्य गौरव एवं जन संचार , ग्राम्य-दर्पण (कहानी - संग्रह ) |
पुरस्कार - गुरुश्रेष्ठ ,गुरुपरम एवं वर्ष -२००५ में राष्ट्रीय पुरस्कार ,स्थानीय नगर पालिका , तहसीलदार तथा एस.डी.एम. द्वारा प्रशास्ति पत्र |
संपर्क - 9414750971, 9982395653
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Saturday, September 5, 2015
शिक्षक और शिक्षा
शिक्षक और शिक्षा
शिक्षा की लगाम अब ,बे- लगाम हो रही है |
जिसकी चर्चा अब सुबह-शाम हो रही है ||
नियम कानून देखो ऐसे-ऐसे बन रहे ,
शिक्षक बेचारे की तो राम-राम हो रही है ||
कैसे अनुशासन का सबक सिखाये वह ,
जब अनुशासन दिखे राह नापती हुई ||
मारना व् डांटना तो कोसों दूर बात है ,
घिघी बंधी उसको आवाज कांपती हुई ||
शिक्षक पूछता कैसे लेट तुम हो गया ?
छात्र बोलता है लेट हो गया तो क्या हुआ ?
सबक दिखाओ जरा उसे क्यों न पूरा किया ?
काम नहीं पूरा किया इसमें क्या हो गया ?
नियम कानून तो शिक्षक को बाँध दिया ,
फिर भी समाज उससे आस है लगाये हुए |
वेतन ने बे-तन तो पहले बना दिया था ,
अब आत्मा पर तीखी नजर गड़ाए हुए ||
तुम ही बताओ मेरे देश के सुधारको ,
एक शिक्षक कैसे पूरी पाठशाला को चलाये |
हिंदी ,अंग्रेजी व् गणित न जाने क्या-क्या ,
कैसे सारे विषयों को एक साथ ओ पढ़ाये ||
हर कोई चाहता है अच्छी शिक्षा लाडले की
कोई शिक्षक कार्य को पर अच्छा नहीं मानता |
आज शिक्षा नाच रही पैसों के इशारे पर ,
इसीलिए शिक्षक को बेचारा सब मानता ||
श्री कृष्ण जन्माष्टमी की हार्दिक शुभ कामनाएँ
श्याम सलोने से-------
हम उसको भाते हैं ,वह हमको भाता है ||------
ग्वाल-बाल संग मिलकर,वह माखन खूब चुराए||
खुद खाए और ग्वालों को भी ,माखन खूब खिलाये ||
हम उसको खिलाते हैं ,वह हमको खिलाता है || -------
यमुना तट पर वह जब संग खेलने आये |
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हम उसे चिढ़ाते हैं, वह हमें चिढ़ाता है ||--------
थोड़ी -सी दहिया के खातिर, गोपी उसे नचावे |
वह हँसकर मुस्काकर, उसके मन को लुभावे ||
वह उसे नचाती है ,वह उसको नचाता है ||-------
मधुवन में गायों को लेकर, उन्हें चराने जावे |
बैठ कुञ्ज की छांवन में, बंशी मधुर बजावे ||
हम उसे सताते हैं ,वह हमें सताता है ||-------
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