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Tuesday, October 18, 2016
Monday, October 17, 2016
सरहद के सैनिक
सरहद के सैनिक
कवित्त-1.
सीमा पे जवान लड़ें खोलि सीना तान लड़ें ,
देश स्वाभिमान कम होना नहीं चाहिए |
नेता जी हमारे जो जवान वीरगति पाते ,
उनके परिवार का धियान होना चाहिए ||
नारी भयी विधवा अनाथ शिशु भये सभी ,
उनकी देखरेख का विधान होना चाहिए |
कहत 'आजाद' वो तो प्राण तजे देश हित ,
नेता जी तुम्हें भी सावधान होना चाहिए ||
कवित्त-2.
उनकी कुर्बानी व्यर्थ तनिक न जाने देंगे ,
ऐसा कह के और उपहास मत कीजिए |
जो गया वो अब कभी वापस न आएगा जी ,
भाषण सुनाय परिहास मत कीजिए ||
अब हीं चुनाव का माहौल भी न आया है जी ,
इसको भुनाने का प्रयास मत कीजिए |
कहत 'आजाद' कुर्सी चाहो जो सलामत तो,
सैनिकों को हाथ खोलने का हक़ दीजिए||
कवित्त-3.
सरहद चीखती है रोज नव रूप लिए,
भारतीय शेरों को दहाड़ने तो दीजिए |
गीदड़ों की धमकी तो सुनि रहे रोज रोज ,
सिंह शावकों को अब हुंकारने तो दीजिए ||
शत्रुओं की क्या मजाल जब संग महाकाल ,
हिमिगिरि अगनि दहकने तो दीजिए |
कहत 'आजाद' मन उठ्यो विकराल ज्वाल ,
नेता जी उसे ज़रा भभकने तो दीजिए ||
Monday, September 5, 2016
मैं शिक्षक मोको पढनो भावै |
मैं शिक्षक मोको पढनो भावै |
पुस्तक ,कापी संगी साथी , लिखि-लिखि कलम बतावै |
ज्ञान मेरो है पूंजी संपत्ति, खर्चहिं से बढ़ि जावै |
बालक संग बालक बनना तो मेरे मन को भावै |
जाति-पाँति और भेदभाव मेरो मन को नाहिं सुहावै |
अपने ज्ञान दीप के बल पर, काम करब मोहिं भावै|
बाल मनन में व्याप्त अँधेरा ,फिर घर नहिं कर पावै |
कुम्भकार सम मोहिं 'आजाद' भी रचना करन सुहावै ||
कवि एवं साहित्यकार &रामचंदर आजाद
मो- 9414750971
Wednesday, August 31, 2016
Tuesday, August 30, 2016
Friday, July 1, 2016
Thursday, June 30, 2016
दर्द अपने चाहते हो
गीत
दर्द अपने चाहते हो यदि छिपाना |
सबसे पहले सीखिए तुम मुस्कराना ||
हो गया है तो ये चेहरा पुराना ||
आपने अपने को न जाना न समझा |
बस यही कहते रहते दुश्मन ज़माना ||
दर्द आँखों में तुम्हारे दिख रहा
है |
और करते आप हँसने का बहाना ||
ज़िन्दगी तन्हाँ नहीं कट पाएगी |
दोस्त तुमको तो पड़ेगा ही बनाना ||
चाहते ‘आजाद’ तुम गम को भगाना |
गीत कोई सीखिए तुम गुनगुनाना ||
कवि एवं साहित्यकार– राम चंदर ‘आजाद’
दूरभाष-
९९८२३९५६५३
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