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Monday, October 17, 2016

सरहद के सैनिक

                                        
                  सरहद के सैनिक 
                      कवित्त-1.
सीमा पे जवान लड़ें खोलि सीना तान लड़ें ,
              देश स्वाभिमान कम होना नहीं चाहिए |
नेता जी हमारे जो जवान वीरगति पाते ,
             उनके परिवार का धियान होना चाहिए ||

नारी भयी विधवा अनाथ शिशु भये सभी ,
              उनकी देखरेख का विधान होना चाहिए |
कहत 'आजाद' वो तो प्राण तजे देश हित ,
             नेता जी तुम्हें भी सावधान होना चाहिए ||

                       कवित्त-2.

उनकी कुर्बानी व्यर्थ तनिक न जाने देंगे ,
                 ऐसा कह के और उपहास मत कीजिए |
जो गया वो अब कभी वापस न आएगा जी ,
                  भाषण सुनाय परिहास मत कीजिए ||

अब हीं चुनाव का माहौल भी न आया है जी ,
                  इसको भुनाने का प्रयास मत कीजिए |
कहत 'आजाद' कुर्सी चाहो जो सलामत तो,
                 सैनिकों को हाथ खोलने का हक़ दीजिए||

                         कवित्त-3.

सरहद चीखती है रोज नव रूप लिए,
                    भारतीय शेरों को दहाड़ने तो दीजिए |
गीदड़ों की धमकी तो सुनि रहे रोज रोज ,
                   सिंह शावकों को अब हुंकारने  तो दीजिए ||

शत्रुओं की क्या मजाल जब संग महाकाल ,
                  हिमिगिरि अगनि दहकने तो दीजिए |
कहत 'आजाद' मन उठ्यो विकराल ज्वाल ,
                  नेता जी उसे ज़रा भभकने तो दीजिए ||





Monday, September 5, 2016

मैं शिक्षक मोको पढनो भावै |




मैं शिक्षक मोको पढनो भावै |
पुस्तक ,कापी संगी साथी , लिखि-लिखि कलम  बतावै |
ज्ञान मेरो है पूंजी संपत्ति, खर्चहिं से बढ़ि जावै |
बालक संग बालक बनना  तो मेरे मन को भावै |
जाति-पाँति और भेदभाव मेरो मन को नाहिं सुहावै |

अपने ज्ञान दीप के बल पर, काम  करब मोहिं भावै|
बाल मनन में व्याप्त अँधेरा ,फिर घर नहिं कर पावै |
कुम्भकार सम मोहिं 'आजाद' भी रचना करन सुहावै ||


   कवि एवं साहित्यकार &रामचंदर आजाद
   मो- 9414750971


Thursday, June 30, 2016

दर्द अपने चाहते हो


           गीत

दर्द अपने चाहते हो यदि छिपाना |
      सबसे पहले सीखिए तुम मुस्कराना ||
   आइना जैसे था वैसे आज भी है |
      हो गया है तो ये चेहरा पुराना ||
आपने अपने को न जाना न समझा |
      बस यही कहते रहते दुश्मन ज़माना ||
दर्द आँखों में तुम्हारे दिख रहा है |
      और करते आप हँसने का बहाना ||
ज़िन्दगी तन्हाँ नहीं कट पाएगी |
       दोस्त तुमको तो पड़ेगा ही बनाना ||
चाहते ‘आजाद’ तुम गम को भगाना |
       गीत कोई सीखिए तुम गुनगुनाना ||

    कवि एवं साहित्यकार– राम चंदर ‘आजाद’

    दूरभाष- ९९८२३९५६५३