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Thursday, June 30, 2016

दर्द अपने चाहते हो


           गीत

दर्द अपने चाहते हो यदि छिपाना |
      सबसे पहले सीखिए तुम मुस्कराना ||
   आइना जैसे था वैसे आज भी है |
      हो गया है तो ये चेहरा पुराना ||
आपने अपने को न जाना न समझा |
      बस यही कहते रहते दुश्मन ज़माना ||
दर्द आँखों में तुम्हारे दिख रहा है |
      और करते आप हँसने का बहाना ||
ज़िन्दगी तन्हाँ नहीं कट पाएगी |
       दोस्त तुमको तो पड़ेगा ही बनाना ||
चाहते ‘आजाद’ तुम गम को भगाना |
       गीत कोई सीखिए तुम गुनगुनाना ||

    कवि एवं साहित्यकार– राम चंदर ‘आजाद’

    दूरभाष- ९९८२३९५६५३

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