मैं शिक्षक मोको पढनो भावै |
पुस्तक ,कापी संगी साथी , लिखि-लिखि कलम बतावै |
ज्ञान मेरो है पूंजी संपत्ति, खर्चहिं से बढ़ि जावै |
बालक संग बालक बनना तो मेरे मन को भावै |
जाति-पाँति और भेदभाव मेरो मन को नाहिं सुहावै |
अपने ज्ञान दीप के बल पर, काम करब मोहिं भावै|
बाल मनन में व्याप्त अँधेरा ,फिर घर नहिं कर पावै |
कुम्भकार सम मोहिं 'आजाद' भी रचना करन सुहावै ||
कवि एवं साहित्यकार &रामचंदर आजाद
मो- 9414750971






