Followers
Wednesday, March 16, 2016
Tuesday, March 15, 2016
Monday, March 14, 2016
चंचल मन
चंचल मन मेरो कहा न माने |
चंचल मन मेरो कहा न माने |
जब जब इसको रोकन चाहूँ सुनत न बात सयाने
|
इक पल रुकत पुनः फिर भाजति नाना करत बहाने||
करम धरम और योग
ध्यान में कुछ पल रुकत रुकाने |
जैसहि थोड़ा अवसर
पावत करत अन्यत्र
पयाने ||
बीते पल को सोचि-
सोचि कर
लागत अश्रु बहाने |
कहि ‘आजाद’ कछु समझ न आवत काम करत मनमाने ||
कवि एवं साहित्यकार – रामचंदर ‘आजाद’
जवाहर नवोदय विद्यालय पचपहाड़ ,झालावाड़ (राज.)
मोबाईल- 9414750971
Thursday, March 10, 2016
Wednesday, March 9, 2016
हम शिवालय चले
हम
शिवालय चले.....
हम शिवालय चले शिव के दीदार को ,
शिव की मंशा न जाने तो क्या
फायदा ||
***********************
दीन-दुखियों के संग जो बसेरा करे ,
उनसे घृणा करें फिर तो क्या
फायदा ||
***********************
पूजा ,वंदन किया,
आरती दीप संग ,
प्रेम मन में न जागे तो
क्या फायदा ||
***********************
कामना,याचना ,पुष्प संग प्रार्थना ,
स्वार्थ मन से न जाए तो क्या फायदा ||
***********************
एक असहाय को देख नजरें फिरीं ,
चन्द सिक्के चढ़ाने से क्या फायदा ||
***********************
गलतियों पर कभी सिर झुकाए नहीं ,
अब यहाँ सिर झुकाने से क्या फायदा ||
***********************
मंत्र जपते रहे , ‘ऊँ शिवाय नमः’ ,
मन
कहीं पर है ‘आजाद’ क्या फायदा ||
Saturday, March 5, 2016
बसंतागमन
बसंतागमन
चहक उठे खग बगियन में फूलों से खुशबू आई है |
ऋतुराज बसंत के स्वागत में भौरों ने तान सुनाई
है ||
****************************
आम गए बौराए सुवास बिखेरत आपन |
फाग के राग सुनाय कोयल फिरती घर आँगन |
गरमी के तेवर देखि देखि ठंडी बहुतै घबराई है ||
ऋतुराज बसंत के स्वागत में भौरों ने तान सुनाई
है ||
****************************
खेतों मुस्काय रही है सरसों पीली ,
ओढ़ चुनरिया चमक रही है अलसी नीली |
गेहुवन की बाली देखि देखि कृषक नैना हरषाई है ||
ऋतुराज बसंत के स्वागत में भौरों ने तान सुनाई
है ||
****************************
लाल, हरे ,पीले ,नीले परिधान पहनकर ,
अवनि लग रही जैसे कोई परी हो सुन्दर |
देख अर्क की चंचल नज़रें वह कुछ कुछ शरमाई है ||
ऋतुराज बसंत के स्वागत में भौरों ने तान सुनाई
है ||
****************************
उर स्पर्शी पवन करे तन मन को विह्वल ,
चहक उठी नूतन उमंग संग प्रकृति चंचल |
यौवन में उन्मत्त प्रकृति आँचल अपनी सरकाई है ||
ऋतुराज बसंत के स्वागत में भौरों ने तान सुनाई
है ||
कवि एवं साहित्यकार – रामचंदर
‘आजाद’
जवाहर नवोदय
विद्यालय पचपहाड़ ,झालावाड़ (राज.)
मोबाईल- 09414750971,09982395653
Subscribe to:
Posts (Atom)






