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Wednesday, January 13, 2021

सेवा धर्म के प्रहरी

 तन समर्पित मन समर्पित

कर दिया जीवन समर्पित।
बहु आयामी, भारत स्वामी
तुम सबके जिह्वा पर चर्चित।।

बाधाओं से विचलित होना।
तुमने कभी न जाना था।
तुम्हें समाज का प्रेरक बन,
सेवा का भाव जगाना था।।

दीनदुःखी के सेवक थे ,
तुम मानवता के पुजारी।
सेवा को ही धर्म बनाया,
तुम रहकर के ब्रह्मचारी।।

धर्म के ठेकेदारों ने जब ,
निम्न समझ ठुकराया।
निज वाणी के कौशल से,
तुमने सबको चौंकाया।।

शिकागो के धर्म सभा में,
जब थोड़ा अवसर पाया।
विश्व पटल पर भारत का,
तुमने परचम लहराया।।

उनके भाषण को सुन,
सबकी हुई बोलती बंद।
सारी सभा मे छा गए,
जब 'स्वामी विवेकानंद'।।



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