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Wednesday, January 13, 2021

हर रोज़ नया वर्ष है

 आज नया वर्ष है।

और कल भी नया वर्ष है।
यदि मन में हर्ष है तो,
हर रोज़ नया वर्ष है।।

समय कभी रुका नहीं,
समय कभी झुका नहीं।
समय के संग झूझकर,
जिसने किया संघर्ष है।।
सच कहूँ उसके लिए,
हर रोज़ नया वर्ष है।।

दाँत किटकिटा रहे हैँ।
नाच रहे और गा रहे हैं।
सी-सी, सिहर-सिहर,
परम्परा निभा रहे हैं।
बधाइयों में छिपी हुई,
बेबसी सहर्ष है।।
हर रोज़ नया वर्ष है।।

कोविड की बीमारी है।
नाईट कर्फ़्यू जारी है।
प्रकृति के प्रकोप का भी,
कहर बहुत भारी है।
जान हथेली पर लिए,
सेवा कर्म में डटे,
डॉक्टर और नर्स हैं।।
हर रोज़ नया वर्ष है।।

विद्यार्थी को आस है।
फोन में क्लास है।
शिक्षक भी झूझ रहा,
ज्ञान उसके पास है।
देश के भविष्य को, 
बचाना बहुत खास है।।
उन्नति के पथ पर अब
मेरा भारत वर्ष है।।
हर रोज़ नया वर्ष है।।


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