आखिर -
राम ने जल समाधि क्यों ली थी?
क्या उनसे भी कोई अपराध हो गया था?
या फिर कोई प्रायश्चित ?
यह प्रश्न आज भी यथावत है
कई सहस्र सदियों के बाद भी।
इसके पीछे -
कहीं शंबुक ऋषि का वध तो नहीं
मन को आंदोलित कर रहा था
कहीं बालि का वध तो नहीं
आड़े आ रहा था
कहीं रावण के खिलाफ विभीषण
का प्रयोग तो नहीं
कहीं अविश्वास प्रकट करती
सीता की अग्नि परीक्षा तो नहीं
कहीं गर्भवती सीता को असहाय
वन भेजने की राजाज्ञा तो नहीं।
आखिर -
राम तो एक प्रतापी राजा थे।
पूरा राज समाज उनके साथ था।
भरत ने तो अयोध्या का राज भी
उन्हें समर्पित कर दिया था।
सभी भाई उनकी सेवा में तत्पर थे।
जल में डूब मरना कायरता का
द्योतक होता है।
राम तो कायर भी नहीं थे।
फिर उन्होंने जल समाधि क्यों ली?
आज भी यह प्रश्न मन को
बार बार सोचने को विवश
करता है।
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