पाँच सौ-हज़ार
सौ रूपए की नोट ने बात कही मुसकाय |
हे हजार और पाँच सौ क्यों इतना इतराय ||
क्यों इतना इतराय समय की लीला न्यारी |
गयौ तुम्हारो बखत आ गयौ
मेरो बारी ||
कहता है ‘आजाद’ तिजोरी समय की चोट |
उसे देख खुश हो रह्यौ सौ रूपए की नोट ||
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बड़के भैय्या आ गए दो हज़ार रंग लाल |
जिनके दर्शन के लिए जनता भई बेहाल ||
जनता भई बेहाल हाल
पूछत नहिं कोई |
सुबह से लेकर शाम रात तक लाइन होई ||
कहता है ‘आजाद’ सुबह जो पहुँचत तड़के |
वही को दर्शन देत हमारे भैय्या बड़के ||
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दो हज़ार की आस में दो सौ छोड्यौ साथ |
पास गयौ जब एटीएम खाली लौट्यौ हाथ ||
खाली लौट्यौ हाथ बड़ी मुश्किल भई भाई |
एक दिवस की सचमुच मजदूरी भी गँवाई ||
कहता है ‘आजाद’ कटेंगे कैसे कष्ट अपार |
कौन जुगुति से मिलिहैं नोट ये दो हजार ||

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