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Friday, February 17, 2017

मौसमी बीमारी


          मौसमी बीमारी 

खादी कुरता, गाँधी टोपी ये मौसमी बीमारी है |

मैं नेता हूँ सच कहता हूँ मुझको कुर्सी प्यारी है ||


जनता से नहीं तो किससे कहूँ मन की बातें |

वोट उन्हीं के पास है सो घूमूँगा मैं दिन-रातें |

अब तो क्षेत्र में जाऊँगा क्योंकि चुनाव की बारी है |

मैं नेता हूँ सच कहता हूँ मुझको कुर्सी प्यारी है ||


नए नए वादे फिर से और नयी लुभावन सौगातें |

उनके चेहरे पहले पढूँगा और सुनूँगा उनकी बातें |

हे मतदाता राष्ट्रविधाता यह सेवक आभारी है |

मैं नेता हूँ सच कहता हूँ मुझको कुर्सी प्यारी है ||


दल बदल दिया है हमने आप के खातिर ही |

तुम भी बदलो है सही वक्त अपने खातिर ही |

हे ग्रामदेवता ,जीवनपालक विनती यही हमारी है ||

मैं नेता हूँ सच कहता हूँ मुझको कुर्सी प्यारी है ||


बहकावे में आकर भूल न जाना मुझको |

मुझ-सा नेता नहीं मिलेगा कभी भी तुमको |

अगर जीत जाता हूँ तो समझो जीत तुम्हारी है |

मैं नेता हूँ सच कहता हूँ मुझको कुर्सी प्यारी है ||


तुम भारत के भाग्य विधाता वोट तुम्हारे पास |

मुझे नहीं तो किसे चुनोगे मैं ही हूँ तो ख़ास |

भवन बनेगा सड़क बनेगा बिजली की तैयारी है |

मैं नेता हूँ सच कहता हूँ मुझको कुर्सी प्यारी है ||


सुनो सुनो हे भाई बहनों जरा ध्यान से |

कुछ नेता बातें करते हैं बड़े शान से |

हाथ उठाकर भाषण देना उनकी एक बीमारी है |

मैं नेता हूँ सच कहता हूँ मुझको कुर्सी प्यारी है ||


                       


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