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Saturday, September 15, 2018

ओ मेरे मन

ओ!मेरे मन । ओ,! मेरे मन ।
मेरे संग संग चलाकर । कभी तू।।.......
दूर निकल जाता जब मुझसे मै घबरा जाता हूं।
सच कहता हूं तेरे बिना नहीं चैन से रह पाता हूं।।
याद सताए लौट के आजा  भुला दे अब अनबन ।।.....
सचमुच  तेरे जिद के  आगे मै बेबस हो जाता हूं।
लाख चाहकर भी मैं तुझे कुछ कह नहीं पाता हूं।।
छोड़ दे जिद अब पास में आजा मैं हो रहा अनमन।।.....
भले भुला दे मुझको पर मैं तुझको भूल नहीं पाता हूं। 
तेरी  छवि  अंतरतर में  लिए रात  को सो  जाता हूं।।
भोर भए पर तुम्हे  खोजता कर कर लाख जतन।।.....
हे मन ! मेरे बावले इतना क्यों मुझको तड़पाता है।
तू आज़ाद बनकर घूमे मुझे तनिक नहीं भाता है।।
आ मेरे संग कुछ बातें कर ले बिता ले कुछ कुछ छन।।......
कवि-राम चन्दर आज़ाद

Wednesday, March 7, 2018

महिला


               महिला जागो
मना  रही  महिला दिवस ,
                 दुनिया   देखो आज।
शोषण, अत्याचार से गुंजित,
                 महिला की  आवाज़।।
संविधान ने दे रखे ,
            उन्हें कई अधिकार।
फिर भी वे वंचित अभी,
            जिसकीं वे हक़दार।।
अब भी पुरुष इशारे पर,
             वे सदा नाचती रहती हैं।
जैसा पुरुष चाहता है,
             वे मजबूरन करती हैं।।
अब भी पुरुष परमेश्वर है,
             महिला बस अनुगामी है।
उसकी आशाएँ पदमर्दित,
             गई न उसकी गुलामी है।।
उसे जागना होगा और
              जगाना होगा औरों को।
महिला दिवस सार्थक होगा,
               पा लें अपने अधिकारों को।।

अंतराष्ट्रीय महिला दिवस की,
          हार्दिक शुभकामनाओं
                     के साथ-----------
कवि एवं साहित्यकार- राम चन्दर "आज़ाद"
                              ज.न.वि.लदूना,मंदसौर (म.प्र.)

 

Monday, November 13, 2017

बात पते की

   

स्वाभिमान अभिमान द्वै मनहिं बसेरो लेत |                             

इक गिरने नहीं देत है इक उठने नहीं देत || 

अपनी इच्छा से नहीं मरघट कोई जात |                             

मुर्दे को भी बाँधकर देखो जग लै  जात || 

कबिरा पी एच डी  नहीं मीरा एम फिल नाहिं |                           

 पर अज़ाद जो कहि गए भूल सकत जग नाहिं || 
                                                  



                                                  

Tuesday, July 4, 2017

आज के नेता

       आज के नेता

ये चुनावी गीत है जी आप भी तो गाइए |
वोट हमें दीजिए और हमीं को जिताइए ||
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हम तुम्हारे हमदर्द व हम तुम्हारे सिरदर्द |
दर्द की दवा तो तुम  हमीं से ले जाइए ||
¯¯¯¯¯¯¯¯¯¯¯¯¯
रूपये ले लीजिये या कम्बल वसन लीजिये |
वोट देकर ये हिसाब जल्दी  से चुकाइए  ||
¯¯¯¯¯¯¯¯¯¯¯¯¯
घर तो हम बनायेंगे ही सड़क भी बनायेंगे |
टोल टेक्स देकर मोटर खूब तुम चलाइये ||
¯¯¯¯¯¯¯¯¯¯¯¯¯
सतयुग, द्वापर व् त्रेता में तो हमीं रहे |
कलयुग में अब हमसे नज़र ना चुराइए ||
¯¯¯¯¯¯¯¯¯¯¯¯¯
सपा में भी हमीं हैं और बसपा में हमीं हैं |
  भाजपा में  हमीं  फिर जनि  सकुचाइये ||
¯¯¯¯¯¯¯¯¯¯¯¯¯
तुम तो ‘आजाद’ जी हो हमरी बिरादरी के |
कुछ तो बिरादरी का फ़र्ज़ अब निभाइए ||


Saturday, April 8, 2017

Thursday, March 2, 2017

चुनावी समर

चुनावी समर
यह चुनाव का महासमर है|
रैली, भाषण से व्यथित शहर है |
गाँव-गाँव में गली-गली में ,
रिश्तों में घुल रहा जहर है ||

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छोटका नेता , बड़का नेता ,
खादी कुरता वाला नेता |
सड़क छाप नुक्कड़ का नेता,
सबका अपना अलग असर है ||

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दलबदलू की कमी नहीं है |
जीत की धमकी थमी नहीं है |
जनमत को हथियाने खातिर ,
हर हथकण्डे आठों पहर है ||

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वादों की बौछारें करते,
नई सियासत नित-नित रचते ,
धर्म,जाति ,सम्प्रदायवाद का ,
जनमानस में घुला जहर है ||

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आरोपों ,प्रत्यारोपों की लम्बी फाइल ,
मानो दाग रहें हों जैसे कोई मिसाइल|
कल तक जिस पर जहर उगलते ,
आज उसी से मिली नजर है ||

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शमशानों, कब्रिस्तोनों पर भी चर्चा है |
कहते मैंने सबसे अधिक किया खर्चा है |
शायद मुर्दों से भी कुछ मत मिल ही जाए ,
इस आशा से शमशानों पर गड़ी नजर है ||

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जुमलों की बौछार देखिये ,
प्रतिनिधि भारत सरकार देखिये |
कोई मदारी जैसे आया खेल दिखाने ,
जिसे देख जनता में भी नव जोश लहर है ||

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नेता तो हैं चोर-चोर मौसेरे भाई ,
फिर भी इसमें से चुनना है मेरे भाई |
देश राष्ट्र हित इनको लेकर मंथन करिए ,
फिर निर्णय लें यह चुनाव का शुभ अवसर है ||
कवि एवम् साहित्यकार -राम चन्दर आजाद