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Monday, March 14, 2016

मन मेरो ---

चंचल मन


चंचल मन मेरो कहा न माने |

चंचल मन मेरो कहा न माने |

जब  जब इसको  रोकन चाहूँ  सुनत न  बात  सयाने |
इक पल रुकत पुनः फिर भाजति  नाना  करत  बहाने||

करम धरम और योग  ध्यान में कुछ पल रुकत रुकाने |
जैसहि  थोड़ा  अवसर  पावत  करत   अन्यत्र  पयाने ||

बीते पल  को सोचि- सोचि  कर  लागत  अश्रु  बहाने |
कहि ‘आजाद’ कछु समझ न आवत काम करत मनमाने ||

कवि एवं साहित्यकार – रामचंदर ‘आजाद’
जवाहर नवोदय विद्यालय पचपहाड़ ,झालावाड़ (राज.)
मोबाईल- 9414750971


Wednesday, March 9, 2016

हम शिवालय चले

        हम शिवालय चले.....

   हम शिवालय चले शिव के दीदार को ,
शिव की मंशा न जाने तो क्या फायदा ||
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   दीन-दुखियों के संग जो बसेरा करे ,
      उनसे घृणा करें फिर तो क्या फायदा ||
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पूजा ,वंदन किया, आरती दीप संग ,
      प्रेम मन में न जागे तो क्या फायदा ||
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   कामना,याचना ,पुष्प संग प्रार्थना ,
      स्वार्थ मन से न जाए तो क्या फायदा ||
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   एक असहाय को देख नजरें फिरीं ,
      चन्द  सिक्के चढ़ाने  से क्या फायदा ||
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   गलतियों पर कभी सिर झुकाए नहीं ,
      अब यहाँ सिर झुकाने से क्या फायदा ||
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   मंत्र जपते रहे , ‘ऊँ शिवाय नमः’ ,
       मन कहीं पर है ‘आजाद’ क्या फायदा ||