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Sunday, April 24, 2016

कवित्त- मित्रता

            
                  कवित्त
अपनी महानता का ढोल पीटते हों काहें,
औरों की महानता की क़द्र करि लीजिये |
अधिक चालाक जनि बनहू हमारे मीत,
थोड़ी सी मिताई का लिहाज़ करि लीजिये |
कहत ‘आजाद’ मीत संग न कपट सोहै,
अपनी कुचाल को संभाल रखि लीजिये |
अपनी हिताई हल करने के फेर में तू  ,
मीत मित्रता का बलिदान जनि कीजिये ||

कवि एवं साहित्यकार – रामचंदर ‘आजाद’
ज.न.वि.पचपहाड़ ,झालावाड़ (राज.)
मो. 9982395653






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